सुन्दर वर्तमान दीजिये अपने आपको

जब भी कभी किसी सत्कार्य में डूब जाओगे, पाओगे कि अतीत लापता हो गया । ना अतीत बचा ना भविष्य । जीवन को एक सार्थक

वास्तविक स्वार्थ परमार्थ होता है

सामान्य की जो हमारी परिभाषा है, वो बड़ी गड़बड़ हो गयी है। इसलिए हम विद्रोह नहीं कर पाते। विद्रोह उठता भी है, तो हम उसको दबा

झूठ के दाग

नासमझी में जो सच भी बोला जाए, वो बहुत बड़ा झूठ है।

बिना समझे, सिर्फ डर के कारण या लोभ के कारण, या आदत के कारण, या परम्परा के कारण, अगर तुम सच भी बोल रहे हो तो उसमें सच जैसा क्या है? क्या है सच जैसा? तो समझो, बात को समझो। एक बार समझ गए, तो फिर तुम जो भी बोलोगे वो ठीक होगा। चाहे वो सच हो कि झूठ हो कि क्या हो ,सच-झूठ की परवाह किसको है? बात को समझना ज़रूरी है। नहीं आ रही बात समझ में? या तुमने ये सोचा था, कि मैं बता दूंगा कि नहीं, झूठा-झूठा गंदा, या झूठा-झूठा कड़वा और सच्चा-सच्चा मीठा। ऐसा कुछ नहीं है। तुम्हारे पास सिर्फ तुम्हारी एक चीज़ है, तुम्हारा ध्यान, तुम्हारी समझ।

बात को अगर समझते हो, तो अपने आप जो करोगे, जो कहोगे, वो ठीक ही होगा। तुम्हें परवाह करने की ज़रुरत ही नहीं है कि मैं सच बोल रहा हूँ, कि झूठ बोल रहा हूँ। और भले ही वो कोई संस्था हो, या घर हो, या चौराहा हो, फर्क नहीं पड़ताआचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

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 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

ऐसा घर जहाँ राम धुन लगातार बजती ही रहती है

तीन तरह के लोग हुए, तीन तरह के मन हुए: एक वो, वो पढ़ते भी हैं तो भी पढ़ने के दरमियान भी भज नहीं पाते।

जब सुधरते हैं तो सब एक साथ सुधरते हैं

आम तौर पर जब सुधरते हैं तो सब एक साथ सुधरते हैं, सुधरने के रास्ते मैं बाधा यह बात बन जाती है कि अगर किसी

ओम् है शब्द का मौन में विलीन हो जाना

मौन से तो सब कुछ है। मौन किसी में नहीं समाएगा। ओम् और लाखों अन्य ओम् मौन में ही समाहित हैं। मौन तो आत्मा है, मौन तो सत्य है। मौन तो ब्रह्म है।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: वी.एन.ए रिसोर्ट, ऋषिकेश

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

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