कर्म का कारण और कर्म का परिणाम || आचार्य प्रशांत (2019)

किसी कर्म के पीछे क्या है, ये जानना हो तो, ये देख लो, कि उस कर्म के आगे क्या है।

आगे क्या है? परिणाम।

पीछे क्या है? कारण।

कारण क्या है है किसी कर्म का, ये जानना हो, तो उस कर्म का परिणाम देख लो।

ग्लानि और हीन भावना || आचार्य प्रशांत (2019)

तुम भूल नहीं कर बैठे।

तुम जो कर रहे हो,  तुम वैसे ही हो। ग्लानि क्या दिखा रहे हो?

जैसे कि तुम दौड़ो बहुत ज़ोर से, और तुम्हें ग्लानि उठे कि तुम उड़ क्यों नहीं पाये।  कितनी भी ज़ोर से दौड़ लो, तुम उड़ थोड़े ही जाओगे।

तुम ऐसे ही हो ।

आचार्य प्रशांत: बचपन से ही पीते हो प्रभावों की घुट्टी

हमारी सारी शिक्षा व्यवस्था, लगातार और लगातार, बाहरी वस्तुओं के बारे में रही है । जो जबसे महत्वपूर्ण इकाई है, उसके बारे में हमारी शिक्षा ने कभी सोचा नहीं । क्योंकि जिन्होंने ये शिक्षा पद्यति विकसित की है, वो खुद बड़े नामसझ लोग थे । तो उन्होंने शिक्षा में भर दिया है कि पूरी दुनिया के बारे में जानो । लेकिन जो उस पूरी दुनिया को जान रहा है, उसके बारे में कुछ मत जानो और फिर जब शिक्षा व्यवस्था उस तरह की है, तो शिक्षक भी उसी तरीके के हैं । वो समझते भी नहीं हैं, कि वो किस तरीके के सन्देश दे रहे हैं । पर ये सब कह कर, हमें क्या लाभ है?

क्या हम अतीत में जा कर अपना अतीत बदल सकते हैं? नहीं बदल सकते !

हम सिर्फ यह कर सकते हैं कि आज जो कुछ हो रहा है, हम उसको समझें । आज जो कुछ हो रहा है, हम उसको समझें ।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

दो सूत्र – अपने प्रति ईमानदारी, अपने प्रति हल्कापन

बाहर से जो आ रहा है वो प्रभाव है, आदत है, ढर्रा है, सुख-दुःख और कुछ नहीं है, यही ढर्रों के नाम हैं। प्रयोग करके देख लो अपनेआप को ये प्रशिक्षण करके देख़ लो कि रोज़ शाम के 7 बजे सुखी हो जाना है; हो जाओगे। अकारण, बस ढर्रा है, ढर्रों का कोई कारण थोड़ी होता है। रोजाने आपको ये प्रशिक्षण दे लो कि कौवे की आवाज़ सुनते ही दुखी हो जाना है, हो जाओगे। मन और शरीर तो प्रशिक्षण पर चलते हैं। हाँ, प्रशिक्षण ऐसे गहरे हो जाते हैं कि लगते ही नहीं कि कभी प्रशिक्षित हुए थे, फिर लगता है कि जैसे ये तो स्वभाव है। तुम्हारी गहरी से गहरी वृत्ति भी मात्र प्रशिक्षण है, जो तुम्हें समय ने दिया है, बड़े लम्बे समय ने, और कुछ नहीं है। उसके पीछे कोई वैध मूल कारण नहीं है। माया अनादि होती है, उसका कारण नहीं खोज पाओगे।
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
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श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

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