हदों में चैन कहाँ पाओगे?

कबीर की सारी अभिव्यक्तियाँ विचार की अभिव्यक्तियाँ नहीं हैं, वो विचार जनित नहीं हैं। चूँकि वो विचार से नहीं आ रही हैं तो हम उनको कहते हैं कि वो सीधे ह्रदय से आ रही हैं, या वो आत्मा के फूल हैं; एक ही बात है।

इतना ही समझना काफी है कि सोच-सोच के नहीं बोला है।

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है?

जो तुमको मिला हुआ है, तुमको उसको जानना है।

जो तुम हो ही अगर वह तुमको जानना है, तो तुमको वह खोना पड़ेगा जो नकली है और जो बाहर से आकार तुम्हारे ऊपर बैठ गया है। उसी को हम कंडीशनिंग का भी नाम देते हैं। ये मत कहो कि ‘कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है’, ऐसे समझो, जो तुम ने पाया हुआ ही है, जो तुम्हारा स्वभाव है, उसको जानने के लिए वह सब छोड़ना पड़ता है, रिजेक्ट करना पड़ता है, ठुकराना पडता है, जो नकली है और जो उधर-इधर से संयोग वश मिल गया था।

शान्ति कैसे पाएँ?

तुमने जो भी कुछ इकट्ठा किया है दुनिया में आ के, जिसे तुम कहते हो जन्म लेना, उस जन्म के परांत, वो अगर तुम्हारे होने के भाव को ही नष्ट किए दे रहा हो, गंदा किए दे रहा हो, तो उसको लिए फिरने से क्या फ़ायदा?

और ये मत समझना कि दुनिया में शांति भी इकट्ठा की जा सकती है और अशांति भी इकट्ठा की जा सकती है तो तुमसे कोई चूक हो गयी है तो तुमने अशांति इकट्ठा कर ली है।

एक राज़ की बात कहता हूँ- दुनिया से सिर्फ़ अशांति ही इकट्ठा की जा सकती है।

तुमसे कोई चूक नहीं हो गयी है। ये मत सोचना कि तुमने कुछ गलत निर्णय ले लिए। पहले तुम जिन चीज़ों से आकर्षित हो गए और जो तुमने संचित कर लिए, वो गलत थीं।

तुम जो भी कुछ इकट्ठा करोगे, वही तुम्हें अशांत करेगा।