दृश्य और द्रष्टा – द्वैत के दो सिरे

मन वाणी का स्वामी रहे, विवेक मन का स्वामी रहे और विवेक आत्मा से उद्भूत हो और आत्मा से क्या अर्थ है? वही जो मेरा तत्त्व है, जो मेरा मूल तत्त्व है। सब कुछ उससे जुड़ा हुआ रहे, वही स्रोत रूप रहे। मन स्रोत में समाया हुआ है, मन स्रोत में समाया हुआ रहे। यही जब मन स्रोत से अलग होता है उसी को फिर भक्ति वाणी विरह का नाम देते हैं। मन का स्रोत से अलग हो जाना ही विरह है।
————————–
आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadva।t.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadva।t.com पर
या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadva।t.com
या संपर्क करें:
श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadva।t.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
—————————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

कबीर: टुकड़ा टुकड़ा मन

जो मन द्वैत में जीता है, जो मन पदार्थ में जीता है, जो मन बस उसी को सच मान के जीता है, जो दिखाई-सुनाई देता है, जो स्पर्श किया जा सकता है, वही फटा मन है। और कोई नहीं फटा मन है। जो भी मन वस्तुओं में जिएगा, वही फटा मन है। जो भी मन इन्द्रियों में जिएगा, वही फटा मन है।
——————————————-
अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: +91-9818591240
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

क्यों ज़रुरी है कि संसार का काम चलता रहे?

अगर सत्य को सबसे ऊपर रखोगे तो कहोगे वो सबसे ऊपर; आगे का वो तय करेगा। काम-धंधे चलने होंगे तो चलेंगे और नहीं चलने होंगे तो ठप पड़ जाए। प्रथम वरियता तो उसको है ना। आगे की वो जाने और हमें क्या पता कि हमारे लिये कौन सा काम उचित है। जो सत्य में नहीं है जो झूठ में है वो काम भी कैसे कर रहा होगा? तो अभी तो मैं यह भी नहीं जानता कि काम कौनसा ठीक। सत्य में आने के बाद ही तो पता चलेगा कि करने लायक काम है भी कौनसा है।
——————————————-
अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: +91-9818591240
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

बाहर देख-देख खुद को भूल ही जाते हो

बचपन से तुम जो भी करो दूसरों को ध्यान में रख के ही करो। तो फिर एक स्तिथि ऐसी आ जाती है जहाँ पर तुम्हारे लिए असंभव हो जाता है कुछ भी अपने लिए कर पाना। तुम्हारे पास वो आँख ही नहीं बचती जो अकेला कुछ कर सके। तुम पागल हो जाओगे अगर तुमसे कहा जाए कि तुम कोई काम करो जो सिर्फ तुम्हारे लिए है और तुम्हें दूसरों से कोई मतलब नहीं रखना। तुम पागल हो जाओगे। तुम खाली हो जाओगे बिलकुल तुमसे कुछ निकलेगा ही नहीं। तुम्हारा जैसे स्रोत ही बंद हो गया हो।
———————-
हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

अभिभावकों से स्वस्थ सम्बन्ध

प्रेम ये नहीं होता कि तुम अपनी मानसिकता कि कोठरी में कैद हो और हम उसी में कैद रहने देंगे। प्रेम कहता है कि भले हमारे-तुम्हारे संबंधों में तनाव आ जाए लेकिन मैं तुम्हें भी मुक्त करके रहूँगा क्योंकि मैंने मुक्ति जानी है और मुक्ति बड़ी आनंदपूर्ण है। तो भले तुम्हें बुरा लगे, फिर भी मैं तुम्हारी साहयता करूँगा। एक-दुसरे को बंधन में डालने का नाम थोड़े ही प्रेम है।

~ आचार्य प्रशांत
__________

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

1 2 3 4 5 19