मोह भय में मरे, प्रेम चिंता न करे

इंसान की गहरी से गहरी प्यास होती है प्रेम की; वो जब मिलती नहीं है तो दिमाग बिल्कुल रुखा-सूखा और भ्रष्ट हो जाता है । प्रेम कल की परवाह नहीं करता, वो समझदार होता है, वो अच्छे से जानता है कि कल आज से ही निकलेगा । प्रेम कहता है आज में पूरी तरह से डूबो, आज अगर सुन्दर है तो कल की चिंता करने की ज़रूरत ही नहीं । ये प्रेम का अनिवार्य लक्षण है कि प्रेम आज में जियेगा ।

कल की फ़िक्र करेगा नहीं क्योंकि प्रेम बहुत समझदार है और वो अच्छे से जानता है कि जिसने आज को पूरा-पूरा जी लिया, पी लिया उसका कल अपनेआप ठीक रहेगा, बिना फ़िक्र किये । पर जहाँ प्रेम नहीं होता वहाँ आज की अवहेलना कर दी जाती है और कल की कल्पना की जाती है । आज की अवहेलना, कल की कल्पना ।

झूठी आस्तिकता

अगर तुमने गीता जान ली तो तुमसे जन्माष्टमी उस तरीके से मनाई ही नहीं जायेगी जैसे लोग मनाते हैं। तुम वो सब कर ही नहीं पाओगे, जो दुनिया करती है कृष्ण के नाम पर। एक बार तुमने कृष्ण को जान लिया तो तुम कहोगे कि “छि:, कृष्ण के नाम पर यह सब होता है!” तुमने राम को जान लिया तो तुमसे दीवाली, दशहरा वैसे मनाये ही नहीं जायेंगे, जैसे दुनिया मनाती है।

दीवाली, दशहरा मना ही वही लोग रहे हैं, जिनका राम से कोई नाता नहीं। और जन्माष्टमी पर सबसे ज्यादा उछल-कूद वो कर रहे हैं, जिन्हें कृष्ण से कोई लेना-देना नहीं। उन्हें उछल-कूद से लेना देना है, मनोरंजन है। दीवाली, दशहरा क्या है उनके लिए? मनोरंजन है। कोई राम की भक्ति थोड़े ही है।

अलग-अलग धर्म क्यों हैं?

किसी ने उगता हुआ सूरज देखा । किसी ने बरसात का सूरज देखा । किसी ने अमेरिका में बैठकर देखा । किसी ने अफ्रीका में बैठकर देखा । और सबने देखा सूरज लेकिन आधा-तिरछा देखा या किसी माध्यम से देखा ।

अब जो देखने वाले थे, वो चले गए । जिन्होंने देखा था, वो चले गये । उनकी लिखी किताबें बची हैं । किताबों में ज़िक्र किसका है- ‘सूरज का और चश्मे का’ । सूरज तो पढ़ने वाले जान नहीं पाते क्योंकि सूरज तो बताने की चीज़ नहीं है । सूरज तो अनुभव करने की चीज है । सूरज तो जान नहीं पाते । हाँ, चश्मे को जान जाते हैं ।

अवलोकन और ध्यान में अंतर

हमारे जीवन में यदि उर्जा का अभाव है, यदि हम जो कुछ भी करते हैं उसमे संशय बना रहता है, तो स्पष्ट है कि जीवन में स्पष्टता नहीं है, निजता नहीं हैI कारण – जीवन में ‘अवलोकन’ नहीं हैI अवलोकन किसी भी चीज को स्पष्ट रूप से देखना है – बिना धारणाओं के हस्तक्षेप के – यानि ध्यान की पृष्ठभूमि में देखना है, और ये उर्जा का अनंत स्रोत हैI ये बिखरी हुई, अस्पष्ट, दिशाहीन उर्जा नहीं है, बल्कि केन्द्रित है, एक नुकीली तीर की तरह, जिसे स्पष्ट पता है कि उचित कर्म क्या हैI

निम्न विचार और उच्च विचार क्या?

प्रश्न: निम्न विचार और उच्च विचार क्या हैं? वक्ता: हम में से कितने लोगों को ये सवाल अपने सन्दर्भ में उचित लग रहा है? कितने लोगों

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