जो ही जगेगा, वो ही करुणा से भर जाएगा

जगा हुआ व्यक्ति पूरे संसार के लिए शुभ सन्देश होता है, सूरज की तरह होता है जो पूरी दुनिया का अँधेरा मिटाए| जगे हुए होने का अर्थ ही यही है कि, ”अब आत्म-केन्द्रित नहीं रहा, कि अब मेरा आत्म ब्रह्म हो चुका है|

मैं दुविधा में क्यों रहती हूँ?

माया किस रूप में तुम्हारे मन में घुसी है, ये जानने का — मैं दोहरा रहा हूँ — यही तरीका है कि देख लो कि दिन रात किसके बारे में सोच रहे हो? तुम समाज सेवा के बारे में सोच रहे हो, तो माया समाज सेवा बन के आ गई है। तुम धर्म के बारे में सोच रहे हो तो, माया धर्म बन के आ गई है। इसीलिए लाओ त्सू तुमसे कहता है न कि जब प्रेम नहीं होता तो प्रेम के बारे में सोचते हो। जब धर्म नहीं होता तो धर्म के बारे में सोचते हो। जिस धर्म के बारे में सोचा जाए वो धर्म, धर्म नहीं माया है। जिस प्रेम के विषय में सोचना पड़े, और जो मन में उमड़ता-घुमड़ता रहे, वो प्रेम नहीं है माया है।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

सम्पन्नता ये नहीं कि तुम्हारे पास क्या है, सम्पन्नता है कि तुम क्या हो

आपको अपने सभी संबंधों को बड़ी स्पष्टता से देखना होगा। जब भी किसी को देखना, चाहे वो बॉस हो, चाहे वो दोस्त हो और चाहे वो कोर्टशिप का केस हो, प्रेमी हो या प्रेमिका, उसको ऐसे मत देखना कि उसके पास क्या है, ये देखना कि वो क्या है। ये मत देखना कि व्हाट डज़ ही हैव, देखना कि व्हाट ही ऑर शी ईज़। हमारी आँखें धोखा खा जाती हैं। हमारा ध्यान ‘हैव ’ खींच ले जाता है कि इसके पास क्या है। हम ये नहीं देख पाते कि ये क्या है। अंतर समझ में आ रहा है?
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

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आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

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श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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दूर के लक्ष्यों में धूर्तता छुप बैठती है

अगर तुम लक्ष्य की प्रति ईमानदार रहो और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी का अर्थ यही होता है कि मेरा लक्ष्य वही है जो मेरे सामने है। भविष्य किसने देखा है ? उसमें तुम कैसे तीर चलाते रहोगे? और ठीक-ठीक बताओ , तुम तीर चला भी लो , तो तुम्हें पक्का है कि तुम वही करना चाहते हो जो आज सोच रहे हो? तुमने कल जो सोचा था, आज भी वही करना चाहते हो? ईमानदारी से बताना। तुमने परसों जो सोचा था क्या तुमने कल वही किया? क्या तुम पंद्रह की उम्र में वही कर रहे थे जो पांच की उम्र में सोचा था? पच्चीस की उम्र में वही कर रहे हो जो पंद्रह की उम्र में सोचा था? ऐसा तो कुछ होता नहीं। न तुम्हारे साथ न किसी और के साथ।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 24 तारीख को अपना 27वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

ईसा मसीह के जन्म दिवस को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने का इस बोध शिविर से बेहतर मौका कहाँ हो सकता है!

विश्व भर के आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने, आचार्य प्रशांत जी के संग समय बिताने, और गंगा किनारे बैठ खुदमें डूब जाने का भी यह एक अनूठा अवसर है।

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विचार कहाँ से आते हैं?

“हम सब कहते हैं कि हमें एक नया भविष्य चाहिए,ठीक है न? हम सभी कहते हैं कि हमें एक नया, खुशहाल भविष्य चाहिए। पर मज़ेदार बात यह है कि आपकी सारी कल्पना जो भविष्य के बारे में होती है, उसमें कुछ नया है ही नहीं। वो सब आपके अतीत से आ रहीं हैं। आपकी सभी कल्पनाएँ, भविष्य के बारे में अतीत से ही आती हैं। चाहे आप कितना भी दावा कर लें कि आपको एक नया भविष्य चाहिए, आप और कुछ नहीं सिर्फ अतीत का पुनह्चक्रण चाहते हैं क्यूँकी नए के बारे में तो मैं सोच ही नहीं सकता।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 24 तारीख को अपना 27वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

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जब आँखें खुलती हैं तो दुनिया बदल जाती है

परिवर्तन हमेशा पुराने के सन्दर्भ में होता है। परिवर्तन का अर्थ है कि पुराना गायब है और उसमें कोई थोड़ा सा बदलाव आ गया है। अगर मैं कह रहा हूँ कि दुनिया बदल गई तो मेरा अर्थ ये है कि पुराना पूर्णतया ख़त्म हो गया, परिवर्तन नहीं हो गया बल्कि ख़त्म हो गया, बदल गई। इसी कारण से हमें ये जान पाना करीब-करीब असंभव है कि खुली हुई आँखों से जब दुनिया को देखा जाता है तो वो कैसी दिखती है, क्योंकि वो एक परिवर्तित दुनिया नहीं होती है। परिवर्तित दुनिया की तो आप कल्पना कर लोगे। वो आपकी मान्यताओं के आस-पास की ही है तो आप उसकी कल्पना कर लोगे। खुली आँखों से जो दुनिया देखी जाती है वो बिलकुल ही अलग होती है।
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आप सभी आमंत्रित हैं:
‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ पर आचार्य प्रशांत द्वारा शब्द योग सत्र
दिनांक: 26.10.2016
स्थान: तीसरी मंजिल, G-39, सेक्टर-63, नॉएडा
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

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