सन्यास-मूर्खता से प्रतिरोध

पुरुष की अपूर्णता है कि, उसके अहंकार को ‘जीतना’ है। स्त्री की अपूर्णता है कि, उसके अहंकार को कब्ज़ा करके बैठना है। पुरुष का अहंकार उस राजा की तरह है, जो कभी अपनी राजधानी में पाया नहीं जाता क्यूंकि उसे और जीतना है। वो हमेशा अपनी सीमाओं को बढ़ाने के प्रयास में लगा रहता है। वो सोचता है कि कुछ है, जो बहुत दूर है और मैं अपनी सीमाओं को और बढ़ा करके उस तक पहुँच जाऊंगा। पुरुष को इसीलिए ‘और’ चाहिए। पुरुष का मन अक्सर एक स्त्री से भरेगा नहीं, उसको अपनी परिधि बढ़ानी है। उसको लग रहा है कि जो परम है, वो कहीं दूर बैठा हुआ है और उस तक पहुंचना है।

स्त्री का अहंकार सूक्ष्मतर है; एक कदम आगे है वो पुरुष से, उसे और नहीं चाहिए। इतना तो वो समझ गई है कि भाग-भाग के कुछ नहीं होगा, सीमा बढ़ाकर कुछ नहीं होगा, मिल यहीं जाएगा लेकिन इतना समझने के बावजूद डरती है कि यहाँ जो मिला हुआ है वो कभी भी छिन सकता है। तो वो कब्ज़ा करके बैठने चाहती है।
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29वां अद्वैत बोध शिविर
24 से 27 फरवरी, शिवपुरी, ऋषिकेश
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श्री अंशु शर्मा: +91 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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मूर्ति द्वार है अमूर्त का

संगति ही सब कुछ है – और मीरा ने कर ली है कृष्ण की संगति। तुम देखो तुमने किसकी संगति करी है?

मन तो प्रभावों के संकलन का नाम है, जैसे माहौल में उसे रखोगे वैसा हो जाएगा; तुम देखलो कि तुमने उसे कैसे माहौल में रखा है?

मीरा को कृष्ण के अलावा और कुछ दिखाई नहीं देता था, दिन-रात वो कृष्ण के साथ ही रहती हैं। तुम देखो कि तुम्हारी आँखों के सामने किसका चित्र घूमता है हर समय? सुबह उठते हो तो कौन-से भगवान की शक्ल दिखाई देती है? आँख खोलते हो तो सामने कौन-सी देवी मौज़ूद रहती है?

जिनकी शक्ल दिन-रात देख रहे हो वैसे ही हो जाओगे।

सभ्यता किस लिए है?

व्यक्ति से व्यक्ति का कोई सम्बन्ध ही ना रहे क्योंकि व्यक्ति से व्यक्ति का जो भी सम्बन्ध बनेगा उसका आधार तो एक ही है, हमारा अहंकार| हम जिसे प्रेम भी कहते हैं वो कुछ नहीं है वो एक अहंकार का दुसरे अहंकार से मिलना है| बड़े अहंकार का छोटे अहंकार से, माँ अहंकार का बच्चे अहंकार से, पुरुष अहंकार का स्त्री अहंकार से और इस तरह से मिलना है कि दोनों का ही अहंकार बल पाता है|

पुरुष जितना पुरुष स्त्री के सामने होता है, उतना कभी नहीं होता| यदि आप पुरुष हैं तो सामान्यता आप ये भूले रहेंगे कि आप पुरुष हैं लेकिन जैसे ही कोई स्त्री सामने आयेगी, आपका पुरुष जग जाएगा| यदि आप स्त्री हैं तो शायद आपको याद भी ना हो कि आप स्त्री हैं पर आप पुरुषों के बीच में बैठेंगी और आपको तुरंत याद आ जायेगा| आप पल्लू ठीक करने लगेंगी|

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