मन हल्का कैसे रहे? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)

‘विश्राम’ का अर्थ है – तनाव फ़िज़ूल है। इससे वो मिलेगा नहीं जो चाहिए।

तनाव अपनेआप नहीं आता है। हम तनाव को पहले बुलाते हैं, और फिर उसे हम पकड़ के भी रखते हैं।

तनाव अपने पाँव चल कर नहीं आता, आमंत्रित किया जाता है, क्योंकि हमें ऐसा लगता है कि तनाव से हमें कुछ मिल जाएगा।

आचार्य प्रशांत,संत कबीर पर: डरो नहीं, तुम सुरक्षित हो

आदमी के ‘विकास’ की सारी यात्रा उसके अपने स्वभाव के विरोध की यात्रा है।

‘विकास’ अस्तित्व से शत्रुता का नाम है और यही कारण है की आज आदमी का ‘विकास’ वहाँ पहुँच गया है जहाँ अस्तित्व समूल विनाश पर खड़ा है।

आदमी जितना विकसित होगा प्रकति का उतना विनाश होगा क्योंकि विनाश की हमारी परिभाषा ही यही है, ‘विरोध’।

जो कुछ भी प्राकृतिक है उसका ‘विरोध’ करना ही हमारे लिए ‘विकास’ है। यही ‘विरोधी मानसिकता’, यही ‘विरोधपूर्ण मानसिकता’, हमें गहराई से डरा के रखती है। यह श्रध्दाहीनता है, यह अहंकार है।

हमारे मन में छवि कुछ ऐसी रहती है की पूरा अस्तित्व हमें नुक्सान पहुँचाने के लिए आतुर है हमें अपनी रक्षा करनी है।

~ आचार्य प्रशांत

——————————————–

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
~~~~~
२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
~~~~~
३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
~~~~~
४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
~~~~~
५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
~~~~~
६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
~~~~~~
७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
~~~~~
८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
~~~~~~
९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
~~~~~~
१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

~~~~~~
इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

हर काम के साथ परिणाम की उम्मीद क्यों?

ऐसा मत सोचो कि जीवन ऐसा होना चाहिए। कोई ज़रूरी नहीं है कि ज़िन्दगी ऐसे ही जी जाए कि अभी जो कुछ हो रहा है उसमें तो कोई मज़ा नहीं, और आगे की उम्मीदें पाल रखी हैं। पर तुम्हें तो बताया ही यही गया है कि दुनिया उम्मीद पर चलती है। दुनिया उम्मीद पर नहीं चलती है, दुनिया अभी है। अभी है। उम्मीद पे सिर्फ कल्पनाएँ चलती हैं। उम्मीद क्या है? कल्पना ही है ना? उम्मीद एक कल्पना ही तो है ना कि आगे कुछ हो जाएगा।

तो तुम देखो, कि तुम्हारी सारी अपेक्षाएँ पैदा कहाँ से होती हैं। तुम्हारी सारी अपेक्षाएँ पैदा ही इसीलिए होती हैं, क्योंकि तुम इस क्षण से बुरी तरह से असंतुष्ट हो। जब इस क्षण से कोई संतुष्टि नहीं मिल रही तो तुम आगे के लिए उम्मीदें पालते हो। जो अभी में पूरा पूरा डूबा होगा, उसको वक़्त कहाँ है जो आगे के लिए सोचे?

आचार्य प्रशांत
____________

आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

कल्पनाएँ ही आलस्य हैं

मन के भागने को ये मत समझ लेना कि वो कुछ पाने जा रहा है कहीं। मन हमेशा, कुछ छोड़ के कहीं और जा रहा होता है। देखो, जाने के दो तरीके होते हैं ना? घर से निकले हो, तो एक तो ये कि मैं बाज़ार से कुछ लेने जा रहा हूँ, मुझे कुछ पाने जाना है कहीं। और दूसरा तरीका क्या होता है, कि घर से लड़ाई हो गयी तो मैं घर छोड़ के जा रहा हूँ। मैं कहीं को नहीं जा रहा, मैं बस घर छोड़ के जा रहा हूँ। ये दो तरीके होते हैं ना? घर से निकलने के।

मन हमेशा दूसरे तरीके से निकलता है, घर से। भ्रम ये होता है कि कुछ पाने जा रहा है। तुम्हें, भ्रम ये होता है कि मन कहीं जा रहा है। तो वो कुछ पायेगा, उसको तुम इच्छाओं का नाम देते हो, कि इच्छाएँ हैं, इसलिए उधर को दौड़ रहा है। नहीं। इच्छाएं भ्रम हैं। मन सिर्फ दौड़ इसीलिए दौड़ रहा होता है, क्योंकि जो रिएलिटी है, वास्तविकता है, उसमें नहीं जीना चाहते। और वो भी तुम्हारी ट्रेनिंग दे दी गयी है। ऐसा नहीं है कि छोटा बच्चा नहीं जीना चाहता या कि एक इंटेलीजेंट आदमी नहीं जीना चाहता। तुम नहीं जीना चाहते क्योंकि तुम्हारी ट्रेनिंग थोड़ी सी गलत हो गयी है।

आचार्य प्रशांत
________________
आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें:  सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf

1 2 3 4