सच्चा सुमिरन कैसे करें ?|| आचार्य प्रशांत, नितनेम साहिब पर 2019

दुनिया में ही कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो आपको स्थानों से मुक्त कर देते हैं।

आप उन स्थानों पर मौजूद तो रहो।

उन्हीं स्थानों पर कुछ समय ऐसे रहते हैं, जो आपको समयातीत से मिला देते हैं।

आप उस समय गायब कहाँ हो?

दुनिया से बाहर जाने की विधि क्या है?

दुनिया।

बस ज़रा विवेक के साथ दुनिया में कदम रखना।

गुरु वो जो तुम्हें घर भेज दे

अँधेरे में रहते आदमी के पास कोई कारण नहीं है रोशनी की तरफ जाने का, सिवाय इसके कि उसे रोशनी की याद आती है। इसी बात को, मोटे, और शास्त्रीय और क्लिष्ट शब्दों में भी कहा जा सकता है। पर उसको सीधे-सीधे ऐसे ही समझ लो, कि कुछ है, अंतर्मन में, गहरा बैठा हुआ, जो रह रह कर के, याद दिलाता है, रोशनी की। और फिर अचानक कभी ऐसा हुआ, कि तुम कोठरी में हो, और किसी ने थोड़ा सा रोशनदान खोल दिया। और फिर क्या हुआ? याद एक ताकत बन गयी, याद एक आवेग बन गयी। अब तुमने कहा, “रोशनदान खुला है, दरवाज़ा खुद खोलूँगा।” नहीं खुल रहा दरवाज़ा तो दीवारें ही तोड़ डालूंगा। पर रोशनी चाहिए। या कि खिड़की में से किसी ने किसी दिन झाँका, और उसके चेहरे को देख कर के तुम्हें रोशनी की याद आ गयी। उसे गुरु कहते हैं।

~आचार्य प्रशांत
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प्रेम में तोहफ़े नहीं दिए जाते, स्वयं को दिया जाता है

जहाँ प्रेम होता है, वहाँ लुक्का-छुप्पी नहीं होती। ऐसा नहीं होता कि ये एक विशेष चीज़ है, तुम्हारी है। विशेष हो कि निर्विशेष हो, जैसे हैं तुम्हारे हैं और खबरदार अगर तुमने ठुकराया। और फिर यह भी नहीं होता कि साल में एक दिन लाए हैं खीर तुम्हारे लिए, फिर तो साल में जो भी बनेगा, जिस दिन भी बनेगा तुम्हारा ही है।
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महत्वपूर्ण है महत्वपूर्ण को याद रखना

फर्क नहीं पड़ता कि तुम्हारे लिए क्या महत्वपूर्ण है और किस बारे में गंभीर हो? यही बुरा है कि किसी बारे में तो गंभीर हो गए न।
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अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

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संवेदनशीलता क्या है? || आचार्य प्रशांत (2015)

सेंसिटिविटी (संवेदनशीलता) का अर्थ यह है कि मन की जो स्थूल, ज़ोर की आवाज़ें होती हैं, उनको ज़रा चुप रहने को बोल देना, ताकि सूक्ष्म सुनाई दे सके।

सेंसिटिविटी (संवेदनशीलता) का अर्थ ही यही होता है – सूक्ष्म आवाज़ें सुन पाना।