आत्म-जिज्ञासा क्या है?

ऐसे समझ लीजिए कि एक बिलकुल ही उद्धमी लड़का है और वो खूब तोड़-फोड़ कर रहा है। मैदान में है, गेंद फेंक रहा है पेड़, पौधे, पत्ते इन सब को नष्ट कर रहा है, परेशान कर रहा है। एक तरीका हो सकता है उसको देखने का कि आपने ये देखा कि वो क्या-क्या कर रहा है। आप देख रहे हैं कि वो अभी दाएँ गया, अभी बाएँ और आप दुनिया भर की चीज़ें गिन रहे हो। आप यह देख रहे हो कि यह जो कुछ कर रहा है उसमें मेरा कितना नुकसान हो रहा है। आप विधियाँ खोज रहे हो कि इसको कैसे काबू में लाना है। आप याद करने की कोशिश कर रहे हो कि और लोग इसको कैसे काबू में ले कर के आए थे और एक दूसरा तरीका ये हो सकता है कि आप कुछ भी नहीं देख रहे हो कि क्या चल रहा है आप बस ये देख रहे हो कि ये बच्चा है । उसके आस-पास क्या हो रहा है, वो किन वस्तुओं से सम्बन्धित है। आपकी उस पर कोई नज़र नहीं है क्योंकि उन वस्तुओं से वो बच्चा ही सम्बन्धित है ना! आपकी नज़र मात्र उस बच्चे पर है और आप उसको देखते हुए कहीं नहीं जा रहे हो स्मृतियों में, ये पता करने कि कल इसने क्या किया था?
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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असली आज़ादी है आत्मा

शरीर भर है जिसे पूरी तरह बाँधा जा सकता है। मन पर सीमा लगाने की कोशिश की जा सकती है पर वह बहुत सफल होगी नहीं और आत्मा पर तो वह कोशिश भी नहीं की जा सकती।

तो इंसान है जो बाँधने की कोशिश करता है और वह भी उसी हद तक जिस हद तक तुम्हारा आचरण है।

अब एक इंसान दूसरे इंसान के आचरण को बाँधने की कोशिश कर रहा है।

प्रकृति के तीन गुण

ज्ञान वो है जो अज्ञान को काटे।
पर ज्ञान के साथ दूषण ये होता है कि वो अज्ञान को तो काट देता है, लेकिन स्वयं बच जाता है।
गुणातीत होने का अर्थ है कि अज्ञान नहीं रहा, और अज्ञान के बाद अब ज्ञान भी नहीं रहा। अब तो शान्त बोध है।
उसी शान्त, खाली बोध को साक्षित्व कहते है।

अवलोकन और ध्यान में अंतर

हमारे जीवन में यदि उर्जा का अभाव है, यदि हम जो कुछ भी करते हैं उसमे संशय बना रहता है, तो स्पष्ट है कि जीवन में स्पष्टता नहीं है, निजता नहीं हैI कारण – जीवन में ‘अवलोकन’ नहीं हैI अवलोकन किसी भी चीज को स्पष्ट रूप से देखना है – बिना धारणाओं के हस्तक्षेप के – यानि ध्यान की पृष्ठभूमि में देखना है, और ये उर्जा का अनंत स्रोत हैI ये बिखरी हुई, अस्पष्ट, दिशाहीन उर्जा नहीं है, बल्कि केन्द्रित है, एक नुकीली तीर की तरह, जिसे स्पष्ट पता है कि उचित कर्म क्या हैI

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