कहानी तीन हाथों वाले बन्दर की

मैं तुम्हें कुछ नया नहीं दे पाऊँगा, हाँ, जो तुम्हारे पास है, दोहरा रहा हूँ,उसको हटा सकता हूँ, तुम्हारी बीमारियों को हटा सकता हूँ। स्वास्थ्य नहीं दे सकता, स्वास्थ्य तुम्हारा अपना है और पूरा है। मात्र कल्पना ही करके देख लो कि कैसा होगा वो दिन, जब तुम्हें कहीं पहुँचने की जल्दी, कुछ पा लेने की ख्वाइश हो ही न। ऐसा लगे, जैसे जितनी ख्वाहिशें थी, वो सब पूरी हो ही गयी हैं, इतनी पूरी हुई हैं कि अब कोई ख्वाहिश बची नहीं। कैसा होगा वो दिन? और अगर उसकी कल्पना ही इतनी मधुर है, तो वो दिन कैसा होगा? जिसकी सिर्फ कल्पना ही इतना संतोष देती है तो दिन कैसा होगा? लेकिन वो दिन दौड़ भाग करके नहीं आएगा, वो दिन चेष्टाएँ करके नहीं आएगा। वो दिन थम करके आएगा, वो दिन ज्ञान में आँख खोल करके आएगा, समझ करके आएगा।
———————-
———————-
हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

दूसरों की मदद का भ्रम

यदि मेरा काम ही यही है कि मैं दूसरों की मदद करता रहूँ, मुझे अपने आप से नज़र चुरानी है और लगातार दूसरों की ओर ही देखते रहना है, एक झूठ में जीना है मुझे, तो मेरे लिए ज़रूरी हो जाता है कि मेरे आस पास ऐसे लोग बने रहें जो मेरी मदद के आकांक्षी हों। और मुझे बहुत अच्छा लगेगा जब लोग मुझसे मदद मांगने आएँगे। कई लोग बिलकुल प्रसन्न हो जाते हैं जब तुम उनके पास मदद मांगने जाओ। जो तुम्हारी मदद मांगने से खुश होता हो, जिसको इस बात में ख़ुशी मिलती हो कि कोई मेरे पास माद मांगने आया, उसको इस बात से दुःख भी होगा कि लोग अब मेरे पास मदद मांगने नहीं आ रहे।
————
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

उचित-अनुचित में भेद कैसे करें?

एक जगा हुआ, एक वास्तविक रूप से बुद्धिमान व्यक्ति जो अपनी निजता में जीता है, वो कभी भेड़ नहीं हो सकता। उसे कोई शौक नहीं है कि किसी का आवागमन करने का और ना वो चाहता है कि कोई और उसका अनुगमन करे। वो कहता है ‘’हम सब पूर्ण ही पैदा हुए हैं।’’ गहरी श्रद्धा है उसके जीवन में, कहता है ‘’बोध सबको उपलब्ध हो सकता है। उस परम की रोशनी हम सबको ही मिली हुई है।’’ और यही व्यक्ति फिर मानवता का फूल होता है “दा सॉल्ट ऑफ अर्थ।” उसके रास्ते में अड़चनें आ सकती हैं, उसे पागल घोषित किया जा सकता है क्योंकी जो समाज के अनुसार ना चले, समाज को वो पागल ही लगता है। उसको ख़तरनाक कहा जा सकता है क्योंकि अन्धेरे के लिए वो खतरनाक ही है, रोशनी होकर।लेकिन वो लोग भी, जो उसे खतरनाक घोषित कर रहे होते हैं, जो उसको पागल कह रहें होते हैं, पत्थर मार रहे होते हैं, ज़हर पिला रहे होते हैं, वो भी कहीं ना कहीं उसकी पूजा कर रहे होते हैं। मन ही मन कहते हैं ‘’काश, हम भी ऐसे हो सकते। हाँ, मारना तो पड़ रहा है इसे, पर काश हमें भी इसकी थोड़ी सी सुगन्ध मिल जाती।‘’
————-
प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
__________
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
————-
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

 मन के बहुतक रंग हैं

ऐसे समझो यहाँ पर अगर तुम सोई हुई हो तो कितने भी सवाल पूछे जाते रहें, क्या तुम्हें पता चलेगा कि सवाल पूछे गए? यानि कि पूछने वाला और जानने वाला दो अलग-अलग इकाईयाँ हैं। पूछा जा सकता है बिना जाने कि पूछा गया? स्लीप-वॉकर होते हैं जो रात में नींद में चलते हैं? वो चल लेते हैं बिना जाने कि चला गया। यानि कि चलने वाला और जानने वाला, दो अलग-अलग हैं। तभी तो चला जा सकता है बिना जाने कि मैं चल रहा हूँ। होता है कि नहीं होता है? जान नहीं रहे हो कि चल रहे हो पर रात में चल रहे हो। यानि कि चलने वाला और जानने वाला दोनों अलग अलग हैं, हैं न?
—————
आचार्य प्रशांत के साथ 26वां अद्वैत बोध शिविर आयोजित किया जा रहा है।

दिनांक: 26-29नवम्बर
स्थान: शिवपुरी, ऋषिकेश, उत्तराखंड

आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
—————
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

सही कर्म कौन सा?

ये मत पूछो कि, ‘ मुझे कैसे पता कि मेरा एक्शन पूर्णतया सही है या नहीं?’ ज़्यादा ईमानदारी की बात यह है कि, ‘मुझे जो चीज़ पता है कि सही है, मैं वो भी कर पा रहा हूँ या नहीं?’ ग़लती यह नहीं है कि कोई पूर्णतया सही कर्म था और वो तुम नहीं कर पाए; ग़लती यह थी कि जो तुम को पता था कि सही है, तुममें वो करने की भी हिम्मत नहीं थी| लोग आमतौर पर यह पूछते हैं कि, ‘हम कैसे पता करें कि ‘‘सही कर्म’ क्या है?’’’ मैं कहता हूँ कि सवाल हटाओ!
———————-
25वां अद्वैत बोध शिविर आचार्य प्रशांत के साथ आयोजित किया जाने वाला है।

दिनांक: 16 से 19 अक्टूबर

स्थान: मुक्तेश्वर, उत्तराखंड

आवेदन हेतु requests@prashantadvait.com पर ई-मेल भेजें।
———————-
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

1 2 3 4 5 22