समझ गये तो मज़ा है, नासमझी एक सज़ा है

श्रोता: सर, ये बहुत बड़ा सवाल है, पता नहीं चलता है क्या गलत है क्या सही।

वक्ता: ये बहुत बड़ा सवाल नहीं है, क्योंकी तुम्हारे लिए ये एक स्वचालित प्रक्रिया है जो तुमने कहीं से उधार पर ले ली है। आपके लिए, गलत और सही, हमेशा बाहर से ही आता है। इसलिए, अभी तुमको बड़ी दिक्क्त हो रही है की पता कैसे चलेगा कि गलत क्या, और सही क्या?

बचपन से ही गलत और सही, तुमको बाहर से ही कहीं से मिल गया था? किसी ने सिखा दिया, “सदा सच बोलो, ये सही बात हो गयी । बड़ों का आदर करो, ये सही बात है । चोरी मत करो, वो गलत बात है।” और तुम्हारे लिए बहुत आसान हो गयी ज़िंदगी । तुम्हें खुद ये कभी समझना ही नहीं पड़ा, तुम्हें खुद ये कभी जानना ही नहीं पड़ा, कि क्या है, जो उचित है? क्योंकि तुम्हारे सारे सही और गलत लगातार बाहर से आते रहे। और अब मैं कह रहा हूँ, कि सही गलत कुछ है ही नहीं। सिर्फ तुम हो, जीवन है, और तुम्हारा जीवन के साथ अनुबंध है। तो तुम्हें बड़ी दिक्क्त आ रही है, कि सर ठीक है, जीवन के साथ एंगेजमेंट तो कर लेंगे, तो फिर ये पता कैसे चलेगा कि ये सही हुआ कि गलत हुआ|

मैं तुमसे कह रहा हूँ, कि तुम हो, तुम्हारी प्यास है, और पानी है, उसको अनुभव करो। और तुम कह रहे हो कि मुझे पता कैसे चलेगा कि मेरी प्यास बुझी कि नहीं। अरे बुझेगी तो पता चल जाएगा भाई।
____________________

आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर

हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)

आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

जागृति माह

जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का हिस्सा बन सकते हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

जो तुम्हें अशांत करे, सो गलत

कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं होता। महत्वपूर्ण बस ये होता है कि जो कर रहे हो, वो तुम्हारा चैन न छीन ले। कोई भी काम महत्वपूर्ण या गैर महत्वपूर्ण नहीं होता। हमने कहा था न कि कुछ भी सही और गलत मानो ही मत, चाहे पूरी दुनिया में आग लग जाए, उसको गलत मत मानना। गलत बस एक बात; क्या?
अशांति।
——————————-
आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
या संपर्क करें:
श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
—————————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

शून्य में नग्न रह जितने लिबास ओढ़ने हों,ओढ़ो

प्रेम एक माहौल है जिसमें सब कुछ हो रहा है। खा रहे हैं, उठ रहे हैं, पी रहे हैं सब प्रेम में हो रहा है। कि जैसे बाहर मौसम अच्छा है, तो जो भी करो अच्छे मौसम में हो रहा है। तो प्रेम एक मौसम की तरह है।
——————————————-
अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: +91-9818591240
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

1 2 3 4 22