सोचने के अलावा और कोई चिंता नहीं होती

सारी झुंझलाहट तुम्हारी शुरू किस क्षण होती है, कभी देखा तुमने ये? तुम्हारी सारी झुंझलाहट शुरू कब होती है? तुम सो रहे हो, और तुम्हें

जो संसार से मिले सो समस्या; समस्या का साक्षित्व है समाधान

सारी चिंता, या सारी प्रसन्नता शुरू किस समय होती है? जब आँखों के सामने संसार आता है, और संसार का बड़ा हिस्सा है समाज, जो इंसान ने बनाया, ये पूरा मॉहौल। ये जैसे ही इन्द्रियों के माध्यम से मन में घुसता है, आक्रमण करता है वैसे ही चिंता शुरू, और इसका कोई उपचार नहीं है, क्योंकि इसकी परिभाषा ही यही है। अगर इसने मन को जकड़ लिया, तो चिंता होनी ही होनी है। तुमने आँख खोली और बाहर उपद्रव देखा, चिंता शुरू, क्योंकि उपद्रव सीधा आँखों से घुस कर के मन तक पहुँचा और मन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। तुम कुछ कर नहीं पाओगे। तो ये तो बड़ी लाचारगी की हालत हो गयी, क्या करें? कुछ करा जा सकता है। करा ये जा सकता है कि तुम अपने आप को मन से ज़रा हटा लो, मन तो पकड़ में आ ही जाएगा संसार की क्योंकि मन बना ही संसार से है।
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अपनी आदतों के सिवा मैं कुछ और नहीं

आदतें जानते हो आप, जो कुछ भी जानकारी के दायरे में आता है, अतीत से आता है, जो भी आप जानते हो और बार-बार करना चाहते हो, जो बार दोहराना चाहते हो, जिसमें मन को सुरक्षा की भावना मिलती है – वो आदत है। मन कहता है, ‘’मैं एक राह पर चल रहा था पिछले 20 सालों से और मेरा कुछ ख़ास बिगड़ नहीं गया , तो अब मैं इसी राह पर और 20 साल चल लेता हूँ। जब आज तक नहीं कुछ हुआ तो अब क्या होगा’’ – यही आदत है। और मैं हूँ कौन? उससे राह पर चलने वाला।
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ईमानदारी, सत्य, पूर्णता

तुमने कोई चीज़ चुराई है और तुम्हें पता है कि छिंन तो जानी ही है। पुलिस वाला आएगा और मार पीट के ले जाएगा, तो उसको हम हर समय छुपाए-छुपाए फिरते हो।यही पोज़ेसिवनेस है – किसी ऐसी चीज़ पर दावा करना जो तुम्हारी है नहीं।तो उसमें दो चीज़े दिखाई देंगी: पहला तुम उसे पकड़े-पकड़े घूमोगे।दूसरा तुम्हें डर लगा रहेगा कि कोई आ कर इसे छीन ले जाएगा।
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समझ हमेशा पूरी होती है

आप सिर्फ़ शोर के नामौजूदगी में जान सकते हैं। आप किसी चीज़ को नहीं समझते है, आप समझ में होते हैं। अब मन समझ में है और जब मन समझ में होता है, स्वतंत्र, तो वो बेचैन नहीं होता। तो सिर्फ़ वही देख के आप कह सकते हो कि सब कुछ सही होगा। बेचैनी के अभाव में ही, जागरूकता होती है। आपको कैसे पता कि आप जागरुक हैं? क्यूँकी आप बेचैन नहीं है।
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समस्याओं का सामना कैसे करें?

मन ऐसा तैयार करो कि वो हर स्थिति को देख ले; पूरा देखले; पार देखले। और फिर कहीं से भागेगा नहीं वो। वो सामना ही करता है। कुछ पड़ा नहीं रहने देता। तो तुम तैयार करो, साफ़ रखो। उसके बाद एक अद्भुत घटना और भी घट सकती है। वो ये कि तुम्हें किसी परिस्थिति को हल करना ही न पड़े। तुम्हारी आहट भर से परिस्थिति खुद हल हो जाए। तुम्हारी आहट भर से परिस्थिति खुद हल हो जाए। तुम्हारे आस पास समस्याएं, माया भटके ही न। नज़र तुम्हारी इतनी तेज़ हो कि देखने भर से जितना अज्ञान है, सब घुल जाए। तुम जिस कमरे में बैठे हो, अपनेआप वहाँ का माहौल ऐसा हो जाए कि अब यहाँ कोई टुच्ची बात हो ही नहीं सकती। तुम जिस घर में हो, उस घर की तबियत बदल जाए। वो सब अपनेआप होने लगेगा।
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