किसी की मदद किस सीमा तक करनी चाहिए? || आचार्य प्रशांत (2019)

अपनी मदद और दूसरों की मदद एक ही चीज़ है, और वो साथ-साथ चलेगी।

दूसरों की जितनी मदद करोगे, तुम्हारी उतनी मदद होती रहेगी।

और तुम अपनी जितनी मदद करोगे, दूसरों की मदद करने के उतने काबिल बनोगे। 

किसी को सभी मूर्ख बनाते हों तो? || आचार्य प्रशांत (2018)

तो बात हिम्मत की नहीं है, कि वो उनसे डर गए इसीलिए उनके निकट नहीं गए।

वो उनके निकट इसीलिए नहीं जाएँगे, क्योंकि वो उनको समझदार देखेंगे, होशियार देखेंगे।

वो उनके निकट इसीलिए नहीं जाएँगे, क्योंकि उनको पता है कि वहाँ उनका स्वार्थ सिद्ध नहीं होगा।

उनको पता है कि उनके पास जाकर वो बेवक़ूफ़ नहीं बना पाएँगे।

तो उनके पास जाकर वो व्यर्थ की बात करेंगे ही नहीं।

गुस्से में चीखने-चिल्लाने की समस्या || आचार्य प्रशांत (2018)

जिसे दूसरे को समझाना हो कि क्या सही है, क्या ग़लत है, उसे अपने सारे दोष साफ़-साफ़ पता होने चाहिए।

अगर अपने ही मन की ख़बर नहीं, तो तुम वैसे ही हो जैसे दूसरा है।

उसे भी अपने मन की ख़बर नहीं।

इसलिए समझा नहीं पाओगे।

सजगता का सस्ता विकल्प है डर || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)

डर बीमारी है जो हमने खुद पाल रखी है।

और डर पर सीधा हमला नहीं किया जा सकता, क्योंकि डर एक अधूरे जीवन की पैदाइश है।

जीवन पूरा कर लो, डर अपने आप चला जाएगा।

जो एक पूरा-पूरा जीवन जी रहा है, वो डर नहीं सकता।

डर आता है ताकि रोमांच आ सके।

जिसके जीवन में रोमांच पहले से ही है, उसके जीवन में डर की कोई जगह नहीं है।

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: करेक्टली नहीं, राइटली जियो (नैतिकता नहीं, धर्म) ||(२०१२)

ढर्रों पर लगातार चलते रहना अंधेपन का लक्षण है।

‘उचित’ मेरी अपनी समझ से आता है। ‘ढर्रे’ हमेशा एक बंधी-बंधाई चीज़ होती है। उचित कभी बंध नहीं सकता। उचित बहुत अलग-अलग चीज़ें हो सकती है। कभी यहाँ भीड़ है तो वहाँ से निकलना उचित है, कभी ये दोनों ही बंद है, तो बीच वाले दरवाजे पर दस्तक देना उचित हो सकता है। कभी आग लगी है तो इसे तोड़ देना भी उचित है। ‘उचित’ कोई एक चीज़ नहीं हो सकती, ‘उचित’ अनंत है, क्योंकि ‘उचित’ मेरी उस समय की समझ से निकलता है।

जीवन ढर्रों पर जीना चाहते हो या उचित जीना चाहते हो?

वो सब कुछ जहाँ तुमने ये मान रखा है कि ऐसे ही करना होता है; समझ लो, की तुम अंधे की तरह व्यवहार कर रहे हो। वो सब कुछ जहाँ तुमने मान रखा है कि जीवन ऐसा ही होता है, बस समझ लो कि तुम ‘ढर्रों’ के फेर में फँस गए हो। वो सब कुछ जहाँ तुमने ये मान रखा है कि यही करना ठीक होता है ना, हमें यही सिखाया गया है कि ये सही है, ये गलत है, ये नैतिक है, ये अनैतिक है। बस, समझ लो कि तुम ‘ढर्रों’ के चक्कर में फँसे हुए हो।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: बाहरी प्रभावों से कैसे बचा जाए? || (२०१३)

बाहर तो ये नकली चेहरा लटका होता है, शान्ति का। क्योंकि बाहर से व्याकुलता दिखाओगे तो कोई कहेगा ये पागल आदमी है। क्लास में बैठे हो और बाहर से भी उत्तेजित हो तो शिक्षक क्लास से बाहर निकाल देगा। दोस्तों के साथ हो और बाहर से भी दिखा रहे हो कि मैं बहुत उदास और व्याकुल हूँ तो दोस्त भी पास नहीं आएँगे। वो कहेंगे ये कैसा बंदा है, इसके पास मत जाओ।

बाहर-बाहर उदासीनता में रह लो, ख़ुशी में रह लो, व्याकुलता में रह लो, उत्तेजना में रह लो, भीतर से बिलकुल शांत रहो।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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