प्रशंसा – स्वास्थ्य का भ्रम

निंदक मेरा जनि मरु, जीवो आदि जुगादि ।  कबीर सतगुरु पाइये, निंदक के परसादि ॥ वक्ता: स्वास्थ्य स्वभाव है और स्वस्थ होने का मतलब होता

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