अनछुए रहो, अडिग रहो

एक बात समझ लो अच्छे तरीके से: तुममें कोई कमी नहीं है| कोई भी तुम्हें ये जताने आये कि तुममें कोई कमी है, तो सुनो ही मत| कोई तुमसे अगर बोलने आए कि बी.टेक. कर लो वरना बेवक़ूफ़ रह जाओगे, तो भगा दो उसको| कोई बोले कि तुझे ऐसी ऐसी नौकरी नहीं मिली, तो तू बेवक़ूफ़ रह गया, तो भगा दो उसको|

आत्म- विचार से आत्म-बोध तक

वक्ता: देखो, जो मैं कह रहा हूँ अगर वो पूरी तरह समझ में ना आए तो हैरान मत होना, ये बातें पूरी तरह समझने वाली

जीवन – अवसर स्वयं को पाने का

नीकौ हूँ लागत बुरौ, बिन औसर जो होय | प्रात भए फीकी लगे, ज्यौं दीपक की लोय || -नागरीदास वक्ता: ‘नीक’ माने अच्छा| जो अच्छा भी

दुःख – सुख की स्मृति

सुख का साथी जगत सब, दुख का नाही कोय । दुःख का साथी साइयां, ‘दादू’ सदगुरु होय ॥              

अध्यात्म क्या है?

प्रश्न: अध्यात्म क्या है? वक्ता: जानना आपका स्वभाव है| और अगर आप साधारण जानने से ही शुरू करें तो आप जो कुछ जानना चाहते हैं, उसके

मृत्यु में नहीं, मृत्यु की कल्पना में कष्ट है

प्रश्न: मृत्यु से भय इसलिए नहीं लगता कि शरीर छूट जाएगा, पर मृत्यु से पहले का कष्ट आक्रांत करता है| इस कष्ट से बचने का

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