बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥ – कबीर वक्ता: एक ही है जो बड़ा है,

एक और आख़िरी मौका

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार । तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार ।।  ~ कबीर प्रश्न: संसार में मनुष्य जन्म मुश्किल

संवेदनशीलता, भावुकता नहीं

संवेदना का अर्थ ये नहीं है कि तुमने किसी
को रोते देखा और तुम रोने लग गए। संवेदना अर्थ है कि तुमने किसी को रोते
देखा और तुम जान गए कि उसका जो कष्ट है, वो कितना नकली है। और जब तुम जान
जाते हो कि कष्ट नकली है, तभी तुम उसके कष्ट का उपचार भी कर सकते हो।

सफलता क्या है?

प्रश्न: सफलता क्या है? वक्ता: प्रश्न है कि सफलता क्या है। और कितने लोग हैं जिनके मन में यह सवाल उठता है? (श्रोतागण हाथ खड़े करते

क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?

प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है? वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही

हमारा जीवन मात्र वृत्तियों की अभिव्यक्ति

बंदि खलासी भाणै होइ ॥ होरु आखि न सकै कोइ ॥                            

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