सही-गलत के पार

सवाल ये है, हमने क्या जाना है? हमें सब कुछ किसी बाहरी व्यक्ति या किताब ने ही बता दिया है, या जीवन में हमारी अपनी भी कोई दृष्टि है? सही-गलत हम सब के पास है। यहाँ कोई नहीं है तुम में से जो किसी बात को सही या किसी को गलत न समझता हो, लेकिन तुम में से बहुत कम होंगे जिन्होंने सही-गलत को अपनी नज़र से पाया है।

बोध सशक्त प्रेरणा है

वक्ता: जहाँ मोटिवेशन है, वहां डीमोटिवेशन भी आएगा| मोटिवेशन शब्द ही तभी अर्थपूर्ण है जब पहले डीमोटिवेटीड हो| जो डीमोटिवेटीड है उसी को ही तो

निर्णयों के लिए दूसरों पर निर्भर क्यों?

श्रोता: सवाल है कि ‘क्यों हम अपने निर्णय स्वयं नहीं ले पाते और इस कारण दूसरों पर आश्रित रहते हैं?’ वक्ता: कितने लोग ऐसे हैं जिनकी यही

अकेले चलने में डरता क्यों हूँ ?

श्रोता:  इतना मुश्किल क्यों होता है अकेले चलना? वक्ता: मुश्किल होता नहीं है, पर लगने लग जाता है! क्योंकि तुमने आदत बना ली है, बैशाखियों

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