आदर्शों को अस्वीकार करो

श्रोता: कुछ  उपलब्धियां पाने के बाद एक महान व्यक्ति के लिए आसान होता है अपने रास्ते  को बताना और सुनकर ऐसा लगता है कि कितना आसान रास्ता है। क्या हमें

सही-गलत के पार

सवाल ये है, हमने क्या जाना है? हमें सब कुछ किसी बाहरी व्यक्ति या किताब ने ही बता दिया है, या जीवन में हमारी अपनी भी कोई दृष्टि है? सही-गलत हम सब के पास है। यहाँ कोई नहीं है तुम में से जो किसी बात को सही या किसी को गलत न समझता हो, लेकिन तुम में से बहुत कम होंगे जिन्होंने सही-गलत को अपनी नज़र से पाया है।

बोध सशक्त प्रेरणा है

वक्ता: जहाँ मोटिवेशन है, वहां डीमोटिवेशन भी आएगा| मोटिवेशन शब्द ही तभी अर्थपूर्ण है जब पहले डीमोटिवेटीड हो| जो डीमोटिवेटीड है उसी को ही तो

1 14 15 16 17 18