आध्यात्मिक साधना में वस्त्र आदि का महत्व || आचार्य प्रशांत (2018)

वस्त्रों का अपने आप में कोई महत्त्व नहीं है।

लेकिन वस्त्र तुम्हें याद दिलाते हैं, कि जो करने जा रहे हो, वो महत्त्वपूर्ण है।

कभी वो वस्त्र गेरुए होते हैं, कभी काले होते हैं, कभी श्वेत होते हैं।

और सब प्रकार के रंगों का अपना महत्त्व होता है।

पढ़ाई में मन नहीं लगता? || आचार्य प्रशांत (2019)

अगर रोटी आवश्यक है, तो देख लो कि पढ़ाई के बिना भी कैसे कमा सकते हो। कोई ज़रूरी थोड़ी ही है कि पढ़-लिख कर ही रोटी कमाई जाये। और भी तरीके हैं, उनसे कमा लो।

और पाओ कि रोटी आवश्यक नहीं है, घरवाले ज़बरदस्ती धक्का दे रहे हैं, तो मना कर दो हाथ जोड़कर कि नहीं पढ़ना। और पाओ कि रोटी के लिये ही सही, लेकिन पढ़ना ज़रूरी है, तो पढ़ो बैठकर।

‘मैं’ भाव क्या है? मैं को कैसे देखें?||आचार्य प्रशांत(2019)

जब भीतर से आकुलता ही नहीं उठ रही, न अज्ञान की तड़प है, न मुक्ति छटपटाहट है, तो क्या बताएँ कि अध्यात्म क्या है।

फिर तो यही सब है – इधर-उधर की बातें – कि रुद्राक्ष कितनी पहनने होते हैं, चार्जड पानी पीकर क्या होता है, यही सब अध्यात्म है फिर।

जब इस तरह का मनोरंजक अध्यात्म हो जाये आपका, तो जान लीजिये मुक्ति नहीं चाहिये, मनोरंजन चाहिये।

भौतिक वस्तुओं की क्या महत्ता है? || आचार्य प्रशांत (2019)

तो बात इसकी नहीं है कि पदार्थ अच्छी चीज़ है, या बुरी चीज़ है।

पदार्थ न अच्छा है, न बुरा है।

अनिवार्य है।

जीव हो तुम, जीव के लिये पदार्थ अनिवार्य है।

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