संवेदनशीलता क्या है?

सेंसिटिविटी का अर्थ ये है कि – मन की जो स्थूल, ज़ोर की आवाजें होती हैं,
उनको ज़रा चुप रहने को बोल देना, ताकि सूक्ष्म सुनाई दे सके।
सेंसिटिविटी का अर्थ ही यही होता है – सूक्ष्म आवाज़ें सुन पाना।

आप कब बोलोगे कि – “ये रिकॉर्डर सेंसिटिव है?”

श्रोता १: जब हल्की-सी आवाज़ भी रिकॉर्ड हो रही हो।

वक्ता: जब वो हल्की-सी, सूक्ष्मतम आवाज़ को भी सुन ले – यही सेंसिटिविटी है।
और सूक्ष्मतम आवाज़ को तब सुन पायेगा ना जब पहले भारी,
कर्कश आवाज़ों से उसको मुक्ति मिले।

वो कर्कश आवाज़, वो भारी आवाज़, अहंकार की आवाज़ है।
ज्यों ही वो नहीं रहती, त्यों ही आपको सूक्ष्म आवाजें सुनाई देने लग जाती हैं।

परिपक्वता क्या है?

प्रश्न: सर, परिपक्वता क्या है? वक्ता: (१८-२२ वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की सभा को संबोधित करते हुए) यह शब्द ‘परिपक्वता’ हम सभी को अपने लिए महत्वपूर्ण

भ्रांत कौन, और किसके लिए?

अंतर्विकल्पशून्यस्य बहिः स्वच्छन्दचारिणः। भ्रान्तस्येव दशास्तास्तास्-तादृशा एव जानते॥ – अष्टावक्र गीता (१४- ४) अनुवाद : भीतर से निर्विकल्प और बाहर से स्वच्छंद आवरण वाले, प्रायः भ्रांत

मेरा असली स्वभाव क्या है?

कुत्रापि खेद: कायस्य जिह्वा कुत्रापि खेद्यते।  मन: कुत्रापि तत्त्यक्त्वा पुरुषार्थे स्थित: सुखम्।।  ~ अष्टावक्र गीता(१३.२)  अनुवाद: शारीरिक दुःख भी कहाँ है, वाणी के दुःख भी

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