जब घरवाले अध्यात्म की बातें न सुनना चाहें || आचार्य प्रशांत (2019)

सत्र में तुम जो कमा रहे हो, तुम्हें बाँटना चाहिये।

और जब तुम बच्चे थे, तो तुम आसानी से पिताजी का दिया कुछ भी ले नहीं लेते थे? याद है न माँ खिलाने आती थी, तो तुम कितना उत्पात करते थे?

इसी तरीके से, तुम्हें यहाँ अध्यात्म की जो बातें पता चल रही हैं, तुम्हारी क्यों उम्मीद है कि तुम घर जाओगे, और माँ-बाप को बताओगे, और वो आसानी से ग्रहण कर लेंगे?

वो भी नहीं आसानी से ग्रहण कर रहे।

अब तुम उन्हें बच्चा मनो।

जब उन्होंने तुम्हें बच्चे की तरह देखा, तो उन्होंने तुम्हें स्नेह दिया था न? अब अध्यात्म की दृष्टि से, मान लो कि वो बच्चे हैं। तो तुम उनको स्नेह दो।

प्यार से समझाओ।

आचार्य प्रशांत: झूठा होश

अगर ‘होश’ इतनी सस्ती चीज़ है कि आँख खोलते ही सुबह मिल जाती है, तो उन ऋषियों का क्या हुआ जिन्होंने फिर अथक अनंत साधना करी, ‘होश’ पाने के लिए ।

‘होश’ का अर्थ होता है बोध, जागृति । हम इतने बेहोश हैं कि बेहोशी को ‘होश’ कह रहे हैं ।

आप बेहोशी माँगो !
लेकिन वो बेहोशी जो आपके ‘झूठे होश’ को तोड़े और ‘सच्चे होश’ की ओर ले जाए ।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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वास्तविक स्वार्थ परमार्थ होता है

सामान्य की जो हमारी परिभाषा है, वो बड़ी गड़बड़ हो गयी है। इसलिए हम विद्रोह नहीं कर पाते। विद्रोह उठता भी है, तो हम उसको दबा

बीमारी को बीमारी न मानना ही बीमारी है

सामान्य की जो हमारी परिभाषा है, वो बड़ी गड़बड़ हो गयी है। इसलिए हम विद्रोह नहीं कर पाते। विद्रोह उठता भी है, तो हम उसको दबा देते हैं। हम कहते हैं, हर घर में यही तो हो रहा है। और देखो ना, टी वी को देखो, स्कूल को देखो, कॉलेज को देखो, परिवार को देखो, माँ बाप को देखो, उन सबने यही तो बताया है कि ऐसा ही होता है। और ऐसा ही होता है तो मैं होता कौन हूँ, क्रांति करने वाला। मैं होता कौन हूँ, उस जगह से उठ जाने वाला, जो जगह चुभ रही है।

जैसे मुझे चुभ रहा है, ऐसे ही मेरे पिताजी को चुभ रहा था। ऐसे ही मेरे दादा जी को चुभा था। और हमारे परिवार में, जो चुभ रहा हो उससे न उठने की परंपरा है। वो कभी अपनी गद्दी छोड़ के नहीं उठे, जब चुभ भी रहा था, तो मैं क्यों उठूँ? इतना ही नहीं, उन्होंने कभी चुभन को चुभन कहा ही नहीं। उन्होंने कहा, “ये तो फूलों की पंखुड़ियों का दैवीय स्पर्श है। ये काँटा थोड़े ही चुभ रहा है, ये तो पंखुड़ी मुझे सहला रही है। हम अपने ही प्रति क्रूर और असंवेदनशील हो गए हैं। हमें अपनी ही तड़प के प्रति ज़रा भी सद्भावना नहीं है। एक छोटा बच्चा होता है, आप उसको ज़बरदस्ती गोद में ले लें, वो ऐंठेगा और छिटक के दूर हो जाएगा। देखा है आपने? उसको भी अपने स्वार्थ का ख़याल होता है।

आचार्य प्रशांत
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf 

धोखा भावनाओं का

भावुकता कुछ नहीं है| जब विचार का असर शरीर पर दिखने लगे, तब उसे भावुकता कहते हैं| तो भावना क्या है? भावना, विचार ही है जो अब दिखाई दे रहा है क्योंकि शरीर हिलने लग गया है, आँसू गिरने लग गए हैं, चेहरा लाल होने लग गया है| जब शरीर भी विचार का शिकार हो जाए, तो उस स्तिथि को क्या कहते हैं? भावना| उसमें कुछ ख़ास नहीं है|

आचार्य प्रशांत
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