स्वस्थ मन कैसा?

एक चीनी गुरु थे, वो जंगल ले गये अपने शिष्यों को| वहाँ पर कुछ खड़े हुए पेड़ थे और कुछ कटे हुए पेड़ थे|

गुरु ने अपने शिष्यों से पूछा, “बताओ ज़रा कुछ पेड़ खड़े हुए क्यों हैं और कुछ पेड़ कटे हुए क्यों हैं?”

शिष्यों ने कहा, “जो काम के थे, वो कट गये और उनका उपयोग हो गया|”

गुरु ने पूछा, “और ये जो खड़े हुए हैं, ये कौन से हैं”? शिष्य बोले, “ये वो हैं, जो किसी के काम के नहीं थे|”

गुरु बोले, “बस ठीक है, समझ जाओ|”

मोह भय में मरे, प्रेम चिंता न करे

इंसान की गहरी से गहरी प्यास होती है प्रेम की; वो जब मिलती नहीं है तो दिमाग बिल्कुल रुखा-सूखा और भ्रष्ट हो जाता है । प्रेम कल की परवाह नहीं करता, वो समझदार होता है, वो अच्छे से जानता है कि कल आज से ही निकलेगा । प्रेम कहता है आज में पूरी तरह से डूबो, आज अगर सुन्दर है तो कल की चिंता करने की ज़रूरत ही नहीं । ये प्रेम का अनिवार्य लक्षण है कि प्रेम आज में जियेगा ।

कल की फ़िक्र करेगा नहीं क्योंकि प्रेम बहुत समझदार है और वो अच्छे से जानता है कि जिसने आज को पूरा-पूरा जी लिया, पी लिया उसका कल अपनेआप ठीक रहेगा, बिना फ़िक्र किये । पर जहाँ प्रेम नहीं होता वहाँ आज की अवहेलना कर दी जाती है और कल की कल्पना की जाती है । आज की अवहेलना, कल की कल्पना ।

हमारे रिश्तों की वास्तविकता

जो कुछ भी जन्म से आया है, जो कुछ भी जीवन में मिला है, वो तो चला ही जाना है। इनके आने और जाने को अगर परख लिया, तब तो सत्य फिर भी परिलक्षित हो सकता है, लेकिन ये स्वयं सत्य नहीं बता पाएँगे। जो कुछ भी आया है वो तो खुद द्वैत में है। वो कैसे अद्वैत का पता देगा?

परिपक्वता क्या है?

प्रश्न: सर, परिपक्वता क्या है? वक्ता: (१८-२२ वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की सभा को संबोधित करते हुए) यह शब्द ‘परिपक्वता’ हम सभी को अपने लिए महत्वपूर्ण

निम्न विचार और उच्च विचार क्या?

प्रश्न: निम्न विचार और उच्च विचार क्या हैं? वक्ता: हम में से कितने लोगों को ये सवाल अपने सन्दर्भ में उचित लग रहा है? कितने लोगों

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