अनकहे को सुना तो अज्ञेय को जाना

आध्यात्मिक मन दुनिया को जितनी गहराई से समझता है उतना संसारी मन कभी भी नहीं समझ सकता।

जिसने सूक्ष्मतम को समझ लिया वो बाकी बातों के लिए बड़ा प्रवीण अपनेआप हो जाता है।

उसको नहीं दिक्कत आएगी बाकी दुनिया के सारे काम उसके लिए सध जाएँगे—‘एक साधे सब सधे’। फ़िर वो कुछ भी करने निकलेगा, बढ़िया ही करेगा क्योंकि जो भी करने निकल रहे हो वो दुनिया तो मन की ही है न। उसने मन को ही समझ लिया है तो उसे सब समझ में आता है।

‘उद्गार मौन के’ – इसका क्या अर्थ है?

शब्द वही सुनने लायक है, जो तुम्हें मौन में ले जाए।

व्यक्ति भी वही भला है, जिसकी संगति में तुम मौन हो सको। जान लो कि कौन तुम्हारा मित्र है, कौन नहीं। जिसकी संगति में तुम मौन हो सको, वो तुम्हारा दोस्त है। और जिसकी संगति में तुम अशांत हो जाओ, वो तुम्हारा दुश्मन है।

जो गीत सुनो और बिल्कुल स्थिर हो जाओ, वो गीत भला तुम्हारे लिये। और जो गीत सुनो और उत्तेजित हो जाओ, वो गीत ज़हर है तुम्हारें लिये।

1 2 3 5