विनाश की ओर उन्मुख शिक्षा

जो जितना शिक्षित है, वो उतना बर्बर है; यही तुम्हारी शिक्षा है क्यूँकी शिक्षा का जो मूलभूत ढांचा है, वही झूठा है। बचपन से तुम्हें क्या पढ़ा दिया गया है? बचपन से तुम्हें यही सिखाया गया है कि गणित पढ़ लो, भाषाएँ पढ़ लो, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत पढ़ लो। तुमसे कहा गया है कि इतिहास पढ़ लो पर तुम इतिहास नहीं हो। तुम जो हो, वो तुमको कभी कहा नहीं गया। तुमसे कहा भी नहीं गया कि क्षण भर को रुक कर के अपने आप को भी तो देख लो तो इसीलिए इस अंधी शिक्षा व्यवस्था से जो आदमी निकलता है, तो वैसा ही होता है।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

उचित-अनुचित में भेद कैसे करें?

एक जगा हुआ, एक वास्तविक रूप से बुद्धिमान व्यक्ति जो अपनी निजता में जीता है, वो कभी भेड़ नहीं हो सकता। उसे कोई शौक नहीं है कि किसी का आवागमन करने का और ना वो चाहता है कि कोई और उसका अनुगमन करे। वो कहता है ‘’हम सब पूर्ण ही पैदा हुए हैं।’’ गहरी श्रद्धा है उसके जीवन में, कहता है ‘’बोध सबको उपलब्ध हो सकता है। उस परम की रोशनी हम सबको ही मिली हुई है।’’ और यही व्यक्ति फिर मानवता का फूल होता है “दा सॉल्ट ऑफ अर्थ।” उसके रास्ते में अड़चनें आ सकती हैं, उसे पागल घोषित किया जा सकता है क्योंकी जो समाज के अनुसार ना चले, समाज को वो पागल ही लगता है। उसको ख़तरनाक कहा जा सकता है क्योंकि अन्धेरे के लिए वो खतरनाक ही है, रोशनी होकर।लेकिन वो लोग भी, जो उसे खतरनाक घोषित कर रहे होते हैं, जो उसको पागल कह रहें होते हैं, पत्थर मार रहे होते हैं, ज़हर पिला रहे होते हैं, वो भी कहीं ना कहीं उसकी पूजा कर रहे होते हैं। मन ही मन कहते हैं ‘’काश, हम भी ऐसे हो सकते। हाँ, मारना तो पड़ रहा है इसे, पर काश हमें भी इसकी थोड़ी सी सुगन्ध मिल जाती।‘’
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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निर्भयता, न कि अभयता

भूलना नहीं कि भय जितना गहरा होगा, कॉन्फिडेंस उतना ही ज़्यादा चाहिए होगा| स्थिति तुमको जितना डराएगी, तुम उतना ही ज़्यादा कहोगे कि किसी तरीके से कॉन्फिडेंस मिल जाए और जो आदमी बड़ा कॉंफिडेंट दिखाई पड़ता हो, पक्का है कि वो बहुत ज़्यादा डरा हुआ है अन्यथा वो इतना मोटा कवच पहनता क्यों कॉन्फिडेंस का? लेकिन तुम्हारी पूरी शिक्षा तो यह है कि जो लोग कॉंफिडेंट दिखें उनको आदर्श बना लो|
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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माफ़ करने का क्या अर्थ है?

ना सजा देनी है, न माफ़ करना है। मदद कर सकते हो, तो कर दो और सोए हुए की क्या मदद की जा सकती है? कि उसको जगा दो कि बहुत सो लिया। उठेगा कब? कब तक सपनों में जीता रहेगा? भ्रम में कब तक तेरा मन रहेगा? ऑंखें खोल, हक़ीक़त को देख पर हम यह करते नहीं।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 24 तारीख को अपना 27वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

ईसा मसीह के जन्म दिवस को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने का इस बोध शिविर से बेहतर मौका कहाँ हो सकता है!

विश्व भर के आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने, आचार्य प्रशांत जी के संग समय बिताने, और गंगा किनारे बैठ खुदमें डूब जाने का भी यह एक अनूठा अवसर है।

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श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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मनुष्य वृत्तियों की भूमि पर परिस्थितियों का फैलाव है

यह जो सारे सवाल उठते हैं न बार-बार कि मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है, इसके मूल में यह ही भ्रान्ति है कि यह विश्व ‘बनाया’ गया है। और वो समस्त धर्मों में है, क्योंकि जो शब्द कहे गए है ग्रंथों में उनसे आभास कुछ ऐसा ही होता है कि जैसे कहा जा रहा बनाया गया है, कि ब्रह्मा ने बैठ के बनाया या गॉड ने, अल्लाह ने बैठ के बनाया। जब भी आपको यह लगेगा कि बनाया गया है तो आपको यह भी लगेगा कि बनाने का कोई उद्देश्य होगा उसी को आप बोलते है, नीयति, भाग्य, किस्मत या जो भी, फिर आप यह भी कहते हो एक दिन ख़त्म हो जाएगा, क्योंकि जो कुछ भी बनता है उसका अंत भी आता है। फिर इसलिए आपको यह सब बातें करनी पड़ती है कि प्रभव है तो प्रलय भी होगा, आदि है तो अंत भी होगा, कि क़यामत का दिन आएगा, यह सारी भ्राँतियाँ इस बात से निकल रही हैं। आप समझ रहे हो? समय ख़ुद अपने आप में मानसिक है, न कोई बनाने वाला है, न कुछ बनाया गया है, यह जो सब है ये मात्र मानसिक है।
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वक्ता द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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प्रैक्टिकल या थ्योरिटिकल?

ये थ्योरिटिकल और प्रैक्टिकल में क्या भेद है? कुछ है भी कि नहीं है? क्या अंतर है बोलो?
देखो, ये जो भेद है ये बहुत नासमझी में, हमने बनाया है। कैसे? प्रैक्टिकल शब्द का अर्थ होता है वो जिसकी प्रैक्टिस (अभ्यास) की जा सके यानी जिसको कार्यान्वित किया जा सके। ठीक है ना? जिसको यथार्थ में उतारा जा सके, वही प्रैक्टिकल है? बाक़ी सब काल्पनिक। मानते हो कि नहीं मानते? तुम्हारी थ्योरी की किताबो में क्या ऐसा कुछ भी लिखा है जो काल्पनिक है और यथार्थ में नहीं उतारा जा सकता? क्या तुम्हारी थ्योरी की किताबों में परी-कथाएँ लिखीं हैं? हातिम-ताई, अली-बाबा की कहानियाँ हैं कि जो बिलकुल काल्पनिक हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं? क्या ऐसा है?
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25वां अद्वैत बोध शिविर आचार्य प्रशांत के साथ आयोजित किया जाने वाला है।

दिनांक: 16 से 19 अक्टूबर

स्थान: मुक्तेश्वर, उत्तराखंड

आवेदन हेतु requests@prashantadvait.com पर ई-मेल भेजें।
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