ब्रह्म को कैसे जानें? || आचार्य प्रशांत, आत्मबोध पर (2019)

‘ब्रह्म को जानने’ से आशय है – दुनिया को जान लेना, और दुनिया को जानकर के, मिथ्या पा लेना।

जब दुनिया मिथ्या हो गयी, तो ‘ब्रह्म’ को जान लिया।    

श्रद्धा क्या है? आत्मविश्वास से श्रद्धा का क्या संबंध है? || आचार्य प्रशांत, तत्वबोध पर (2019)

तुम्हें पता होना चाहिये कि तुम्हारा हित कहाँ है।

तुम्हें दिखना चाहिये कि ये चिकित्सक तुम्हारे साथ जो कुछ भी कर रहा है, उसी में तुम्हारा फायदा है। और अगर तुम भागोगे, तो नुकसान अपना ही करोगे।

यही चीज़ तुमको अडिग रख सकती है, गुरु के पास।

और कुछ नहीं।

शमन क्या है? नित्यता क्या है? || आचार्य प्रशांत, तत्वबोध पर (2019)

‘नित्यता’ तो कसौटी है।

‘नित्यता’ वो  कसौटी है जिसपर तुम अनित्य को वर्जित करते हो।

जिसपर तुम अनित्य को गंभीरता से लेने से इंकार करते हो।