श्रद्धाहीन रिश्ते

जो संबंध उपजा ही बीमारी से है वो स्वास्थय कैसे दे सकता है आपको? जो व्यक्ति आपके जीवन में आया ही प्रपंचवश है, वो प्रेम कैसे दे सकता है आपको?
प्रेम पूर्णता से उठता है, प्रपंच से नहीं।

यथार्थ है सहज जानना

हमारा जीवन ऐसा ही है- ‘मेरे सपने क्यों टूट गए?’ अरे सपने थे, टूटेंगे ही, यथार्थ में आओ| क्योंकि तुम्हें सिखाया गया है, ‘ऊँचा सोचो, बड़ा सोचो’, तो तुम्हारा जीवन ही सपनों से भर गया है|

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