गहरी वृत्ति को जानना ही है त्याग

सौ त्याग कर लोगे, माया को कितना भी तज लोगे, माया माने बाहरी माया, ये त्यागा वो त्यागा, पर जब तक मन में जो ग्रंथियां हैं उनको जाना नहीं, त्यागा नहीं, तो बस नशे में भटकते ही रहोगे। बाहरी त्याग से कुछ नहीं होगा, वो आडम्बर बन जाएगा।
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