प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा

वक्ता : प्रेम क्या होता है ? तुम बताओ क्या होता है ? श्रोता :  सर अभी तक जो भी सोचा था, वो सब बोलते हैं ये भी नहीं होता, ये भी

प्रेम क्या है और क्या नहीं?

प्रश्न: प्रेम क्या है? वक्ता: एक संगीतज्ञ था। उसके पास दो लोग सीखने के लिये आए। दोनों से उसने पूछा, “कितना सीखा है? अतीत में संगीत कितना है? कितना सीख कर आये हो?”

माँ-बाप मुझे समझते क्यों नहीं?

कौन है जो कुछ भी समझता है? क्या कोई भी कुछ भी समझ रहा है? सब सिर्फ एक सोच के गुलाम हैं। माँ-बाप भी ऐसे ही लोगों में से हैं। तो इसमें ताजुब्ब क्या है कि उन्हें कुछ भी क्यों नहीं समझ आता? माँ-बाप हो जाने से अचानक आप में कोई दैविक गुण तो आ नहीं जाएंगे। माँ-बाप हो जाना तो सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया है।

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