प्रेम व्यक्त करते डरता क्यों हूँ?

हम प्रेम जानते नहीं, आकर्षण जानते हैं और उसे ही प्रेम का नाम दे दिया है। आकर्षण संस्कारों से प्रेरित होता है। उसमें हम कहीं नहीं होते। प्रेम व्यक्तिगत नहीं होता। प्रेम तो समष्टि से एक हो जाना है। बांटने के भाव में जीना है।

जगत पदार्थ है, तो स्त्री वस्तु मात्र

प्रश्न: सर, औरतों को शादी के उपरान्त अपने पति का उपनाम क्यों लगाना पड़ता है? वक्ता: मेघना, अगर देख पाओगी तो बात साफ़-साफ़ खुल जाएगी। तुमने देखा

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