मेरा असली स्वभाव क्या है?

कुत्रापि खेद: कायस्य जिह्वा कुत्रापि खेद्यते।  मन: कुत्रापि तत्त्यक्त्वा पुरुषार्थे स्थित: सुखम्।।  ~ अष्टावक्र गीता(१३.२)  अनुवाद: शारीरिक दुःख भी कहाँ है, वाणी के दुःख भी

श्रद्धाहीन रिश्ते

जो संबंध उपजा ही बीमारी से है वो स्वास्थय कैसे दे सकता है आपको? जो व्यक्ति आपके जीवन में आया ही प्रपंचवश है, वो प्रेम कैसे दे सकता है आपको?
प्रेम पूर्णता से उठता है, प्रपंच से नहीं।

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