अब लगन लगी की करिये

विक्षिप्त आदमी की पहचान यही है कि वो दस तरफ दौड़ेगा, पागल को कभी देखा है, नहीं चल पाता सीधी राह। आप भी अगर पाते हैं, कि दस तरफ दौड़ते हैं, कभी इधर को आकर्षित होते हैं, कभी उधर को भागते हैं, कभी इधर से डरते हैं, कभी उधर का लालच आता है, ये विक्षिप्तता की निशानी है। आपको नहीं पता कि आपको कहाँ जाना है, इसीलिए आप दस दिशा भागते फिरते हैं। विक्षिप्त आदमी, अंधाधुंध भागता है। और हर दिशा भागता है, जहाँ से ही उसे कोई उम्मीद बंधती है कि सुख मिलेगा, वहाँ भागता है। आप उसे कहिये, मौका आया है, कुछ पैसे कमाने का, उधर को भाग लेगा। आप कहिये, कहीं कुछ मौका आया है, मुनाफा बनाने का, वो भाग लेगा। उसे गुलाम बनाना बड़ा आसान है। थोड़ा सा डर दिखाईये, थोड़ा सा लालच दिखाईये, चल देगा आपके पीछे। बिखरी बिखरी सी उसकी चाल होगी।

विरही मन भी खूब भागता है, पर वो अब दस दिशा नहीं भागता, वो एक दिशा भागता है। विक्षिप्त मन की सारी दिशाएँ संसार की होती है, और विरही मन, एक ग्यारहवीं दिशा की और भागता है, अंतर दिशा। विक्षिप्त आदमी चारों तरफ भाग रहा है, दसों दिशाएँ। विरही भी भागता है, पर संसार में अपनी दिशा नहीं खोजता, वो भीतर दिशा खोजता है।

~आचार्य प्रशांत
____________________

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
~~~~~
२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
~~~~~
३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
~~~~~
४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
~~~~~
५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
~~~~~
६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
~~~~~~
७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
~~~~~
८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
~~~~~~
९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
~~~~~~
१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

~~~~~~
इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

कैसे बताएँ हमें हुआ क्या है

भक्त की दशा को इसीलिए बार-बार कबीर, ‘गूँगे के गुड़’ की दशा भी बोलते हैं। क्या होती है वो दशा? गूँगे के मुँह में है गुड़, अब उसे क्या अनुभव हो रहा है वो कैसे किसी को बताए। मिल तो गया है। तो भक्त का पाना कैसा होता है, वो इसको भी अभिव्यक्त नहीं कर सकता और भक्त का विरह कैसा होता है, वो इसको भी अभिव्यक्त नहीं कर पाएगा। भक्त कहे कि मुझे मिल गया है तो तुम पूछोगे क्या? तो वो क्या बताएगा कि क्या मिल गया है। भक्त कहे कि मुझे नहीं मिला और मैं तड़प रहा हूँ, तो तुम पूछोगे कि क्या नहीं मिला? वो कैसे बताएगा कि क्या नहीं मिला है। दोनों ही स्थितियों में बताए क्या?
—————
आप सब आमंत्रित हैं बोध सत्र में:

‘स्पिरिचुअल हीलिंग’- आचार्य प्रशांत द्वारा शब्द योग सत्र

दिनांक: बुधवार, 26.10.2016

स्थान: तीसरी मंजिल, G-39, सेक्टर-63, नॉएडा
—————
कबीर के वचनों को समझने का प्रयत्न मानवता ने बारम्बार किया है। किन्तु संत को समझने के लिए कुछ संत जैसा होना प्रथम एवं एकमात्र अनिवार्यता है। संत जो कहते हैं उनके अर्थ दो तलों पे होते हैं – शाब्दिक एवं आत्मिक। समाज ने कबीर के वचनों के शाब्दिक अर्थ कर, सदा उन्हें अपने ही तल पर खींचने का प्रयास किया है, आत्मिक अर्थों तक पहुँच पाना उसके लिए दुर्गम प्रतीत होता है। आचार्य प्रशांत ने उन वचनों के आत्मिक अर्थों का रहस्योद्घाटन कर कुछ ऐसे मोती मानवता के समक्ष प्रस्तुत किये हैं जो जीवन की आधारशिला हैं। आज की परिस्थिति में जीवन को सरल एवं सहज भाव में व्यतीत कर पाने का साहस, आचार्य जी के शब्दों से मिलता है।

कबीर, जो सदा सत्य के लिए समर्पित रहे, उनके वचनों के गूढ़ एवं आत्मिक अर्थों से अनभिज्ञ रह जाना वास्तविक जीवन के मिठास से अपरिचित रह जाने के सामान है, कृपा को उपलब्ध न होने के सामान है।

प्रौद्योगिकी युग में थपेड़े खाते हुए मनुष्य के उलझे जीवन के लिए ये पुस्तक प्रकाश स्वरुप है।
http://tinyurl.com/AcharyaPrashant-Gagan

कैसे बताएँ हमें क्या हुआ है

भक्त की दशा को इसीलिए बार-बार कबीर गूंगे के गुड़ की दशा भी बोलते हैं। क्या होती है वो दशा? गूंगे के मुंह में है गुड़, अब उसे क्या अनुभव हो रहा है वो कैसे किसी को बताए; मिल तो गया है। भक्त का पाना कैसा होता है वो इसको भी अभिव्यक्त नहीं कर सकता और भक्त का विरह कैसा होता है वो इसको भी अभिव्यक्त नहीं कर पाएगा। भक्त कहे कि मुझे मिल गया है और तुम पूछोगे क्या मिल गया? तो वो क्या बताएगा कि क्या मिल गया है। भक्त कहे कि मुझे नहीं मिला और मैं तड़प रहा हूँ, तो तुम पूछोगे कि क्या नहीं मिला? वो कैसे बताएगा कि क्या नहीं मिला है। दोनों ही स्तिथियों में बताए क्या?
———-
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

एक अकारण दर्द जो प्राणों से प्यारा है

दो ही तरह के लोग होते हैं – एक जो इस बात को समझ जाते हैं कि मेरे सारे कष्ट बिरह के हैं और वो बिरह का ही उपचार करते हैं और दुसरे वो होते हैं जो अपने बाकी दर्दों का छोटा-मोटा उपचार करते रहते हैं। उनसे पूछे कोई कि समस्या क्या है? तो कहेंगे समस्या यही है कि बिजली बहुत कटती है। तो मेरी ज़िन्दिगी कि यही समस्या है; समस्या क्या है? ५% नंबर कम आगये।
———-
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/
———-
Birth of the Infinity.
The wild playfulness of the Essence.
The madness of Love.
Brimming with mischiefs. Still, unmovable at the centre.

Meet K R I S H N A
———-
Discourse by Acharya Prashant
Day and Date: Wednesday, 24th August 2016.
Venue: 3rd Floor G-39, Sec-63, Noida, U.P
Near Fortis Hospital
Time: 06:30 p.m.
———-
These invaluable sessions are free of cost For any assistance or query contact
Mr.Joydeep Bhattacharya: 9650433495

मूर्ति द्वार है अमूर्त का

संगति ही सब कुछ है – और मीरा ने कर ली है कृष्ण की संगति। तुम देखो तुमने किसकी संगति करी है?

मन तो प्रभावों के संकलन का नाम है, जैसे माहौल में उसे रखोगे वैसा हो जाएगा; तुम देखलो कि तुमने उसे कैसे माहौल में रखा है?

मीरा को कृष्ण के अलावा और कुछ दिखाई नहीं देता था, दिन-रात वो कृष्ण के साथ ही रहती हैं। तुम देखो कि तुम्हारी आँखों के सामने किसका चित्र घूमता है हर समय? सुबह उठते हो तो कौन-से भगवान की शक्ल दिखाई देती है? आँख खोलते हो तो सामने कौन-सी देवी मौज़ूद रहती है?

जिनकी शक्ल दिन-रात देख रहे हो वैसे ही हो जाओगे।