विद्या की गरिमा और सम्मान

विद्या को उसका उचित स्थान दें।

आध्यात्मिकता की ओर अधिक ध्यान, समय और संसाधनों का निवेश करें।

वेदांत जैसे उच्चतम दर्शनों के अध्ययन को संस्थागत रूप दें, संतों के सुंदर गीतों को मुख्यधारा की संस्कृति में प्रवेश करने के अवसर दें, समाज के सब वर्गों को एक समान जीवन के उच्च आयाम की खोज करने का अवसर दें।

केवल यही दृष्टि हमें बचा सकती है, और यही बसंत पंचमी का वास्तविक उत्सव होगा।

उपनिषद् ब्रह्मास्त्र हैं

विद्यार्थी माने? जो विद्या पाना चाहता हो| जो विद्या कि इच्छा रखता हो| अविद्या माने क्या? अविद्या माने वो जो इन्द्रियगत है और मानसिक है|

अज्ञानी अंधेरे में, ज्ञानी और अंधेरे में

माया से आगे आपको वही ले जाता है जो स्वयं माया ना हो;
मानसिक गतिविधि का दायरा वही तोड़ पाता है जो स्वयं मानसिक ना हो|
एक नया विचार आपको निर्विचार नहीं बना सकता|
आप हजारों विचारों के दायरों में क़ैद हैं, उसमे आप कुछ और विचार जोड़ देंगे, इससे आप निर्विचार नहीं हो जायेंगे| आपके पास सौ छवियाँ यूँ ही हैं सत्य की, उसमें आपने दो-चार और जोड़ दीं, उससे आप सत्य के निकट नहीं आ जायेंगे| तो आप जिस अविद्या में फँसे होते हैं, उससे बाहर आपको वो निकालता है जो स्वयं अविद्या ना हो| दूसरे शब्दों में, आप मन के घेरे में फँसे होते हैं, पर आपको कुछ ऐसा बाहर निकालता है, जो स्वयं मन का उत्पाद ना हो|

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-
१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:
अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks
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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

 मन के बहुतक रंग हैं

ऐसे समझो यहाँ पर अगर तुम सोई हुई हो तो कितने भी सवाल पूछे जाते रहें, क्या तुम्हें पता चलेगा कि सवाल पूछे गए? यानि कि पूछने वाला और जानने वाला दो अलग-अलग इकाईयाँ हैं। पूछा जा सकता है बिना जाने कि पूछा गया? स्लीप-वॉकर होते हैं जो रात में नींद में चलते हैं? वो चल लेते हैं बिना जाने कि चला गया। यानि कि चलने वाला और जानने वाला, दो अलग-अलग हैं। तभी तो चला जा सकता है बिना जाने कि मैं चल रहा हूँ। होता है कि नहीं होता है? जान नहीं रहे हो कि चल रहे हो पर रात में चल रहे हो। यानि कि चलने वाला और जानने वाला दोनों अलग अलग हैं, हैं न?
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आचार्य प्रशांत के साथ 26वां अद्वैत बोध शिविर आयोजित किया जा रहा है।

दिनांक: 26-29नवम्बर
स्थान: शिवपुरी, ऋषिकेश, उत्तराखंड

आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/