बीमारी का पता चलना इलाज की शुरुआत है || आचार्य प्रशांत, बाबा बुल्लेशाह पर (2019)

लेकिन गन्दगी का ज्ञान होना, बीमारी का ज्ञान होना, शुभ है।

बुरा लगता है, लेकिन शुभ है।

जैसे -जैसे पता चलता रहे कि मन में घूम ही वही चीज़ें रही हैं जो व्यर्थ हैं, वैसे-वैसे जानती रहिए कि अब इलाज का कार्यक्रम तैयार हो रहा है।

लम्बी लड़ाई है, लड़नी है।

क्योंकि बीमारी का उद्घाटित होना, बीमारी के इलाज की शुरुआत है।

अकेलेपन से घबराहट क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)

तो दूसरों को बुलाना ज़रूरी नहीं है।

ये जो भीतर घुस के बैठा हुआ है, इसको विदा करने ज़्यादा ज़रूरी है।

इसको विदा करो।

ये ग़ैर-जरूरी है, ये अनावश्यक रूप से तुम्हारे भीतर घुस के बैठा है।

जो कुछ भी मन में घुस के बैठा हुआ हो, समझ लो वही सताता है ‘अकेलेपन’ में।

जो भी कोई हो वो, उसको विदा कर दो।

मन को अखाड़ा न बनने दें || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2012)

हमारा मन अखाड़ा बना रहता है — कभी ये विचार, कभी वो विचार।

तुम चलते-फिरते सोचते रहते हो।

ध्यान में बस एक नई चीज़ होती है कि जो ‘विचार’ आते हैं, तुम उनके प्रति सजग हो जाते हो।

और जैसे ही सजग होते हो, कुछ ऐसा देख लेते हो जो शांत कर देता है।

आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर: अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा

‘अबहूँ मिला तो तबहूँ मिलेगा। जीवत ही करो आसा।’

जीवन मानें क्या? जीवन माने ‘अब’। अभी में ही पाओगे। अभी है। इतना दूर भी नहीं है कि विचार करो और अगले पल मिल जाएगा। दूरी इतनी भी नहीं है। जिसने उसे अगले पल तक के लिए भी स्थगित किया, वो भी चूका।

‘जीवत ही करो आसा।’

कबीर के लिए, जीवन है चैतन्य। तुम समझ सकते हो, तो जीवित हो। नहीं समझ सकते तो बस मिट्टी। कबीर के यहाँ पर मिट्टी इंसान को खूब रोंधति है।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

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