नारी के लिए आकर्षण हो तो || आचार्य प्रशांत (2019)

कुछ तो हो जाओ शरीर से आगे के, तो फ़िर तुम्हें दुनिया भी फिर शरीर से आगे की दिखाई दे।

नहीं तो दुनिया का कामकाज चलता रहेगा, तुम्हारी नज़र बस माँस पर रहेगी। 

नहीं है न?

दुनिया को माँस की तरह देखना छोड़ना हो, तो स्वयं को माँस की तरह देखना छोड़ो।

तुम स्वयं जितने ऊँचे उठते जाओगे, दुनिया को देखने का तुम्हारा नज़रिया भी बदलता जाएगा।

स्त्री शरीर का आकर्षण हावी क्यों? || आचार्य प्रशांत (2018)

और वासना को जब विषय चाहिए ही, तो क्यों न उसे ऐसा विषय दे दें जो वासना को ही शांत कर दे।

तुम्हें कुछ तो चाहिए ही पकड़ने के लिए, तो क्यों न तुम्हें कुछ ऐसा दे दें कि जिसको तुमने पकड़ा नहीं, कि वो तुम्हें पकड़ ले।

जो इतना बड़ा हो, कि तुम्हारी पकड़ से बाहर का हो, जिसको पकड़ने के लिए तुम्हें उसमें घुल जाना पड़े।

इसीलिए देने वालों ने तुमको ‘राम’ का नाम दिया, ‘राम’ का काम दिया।

वो नाम भी बहुत बड़ा है, वो काम भी बहुत बड़ा है।

जीवन का अंतिम उद्देश्य क्या है? || आचार्य प्रशांत (2018)

साथ चलना कठिन लग रहा है, साथ छोड़ कर चलना कैसा लगेगा?

तो तुमको ये उम्मीद दे किसने दी कि ज़िन्दगी आसान है? ज़िन्दगी का तो मतलब ही है कठिनाई। आज की रात ये दूसरी-तीसरी बार में बोल रहा हूँ, सही कठिनाई चुनो, सही कष्ट चुनो।

मैं तो बिल्कुल भी ये उम्मीद या दिलासा नहीं देता की मेरे साथ चलोगे तो बड़ी आसानी रहेगी। मेरे साथ चलिगे तो दुविधा रहेगी, द्वंद रहेगा, कठिनाई रहेगी।

हाँ, ये भी देखलो की मेरे साथ नहीं चलोगे तो क्या रहेगा?

आदतें छूटती क्यों नहीं हैं?

अभी तो हालत ये है कि तुम पूरे तरीके से उसके कब्ज़े में हो। और वो कैसी है, वो खोखली है, वो दुर्गंधयुक्त है। तुम उसके कब्ज़े में हो, तो तुम भी कैसे हो? तुम भी उसके जैसे हो गए हो। अब तुम ये चाहते हो कि हम कब्ज़े में तो बने रहे उसके, पर हम खोखले न कहलाएँ। हम सड़े न कहलाएँ। उसकी प्रकृति है खोखला होना। उसकी प्रकृति है सड़ा होना, और वो वैसी ही रहेगी।

तुम इतना ही कर सकते हो कि तुम उससे एक कदम दूर हो जाओ। और वो फिलहाल मेरे कहने भर से तुमसे नहीं होगा। वो एक कदम दूर होना तुम्हारे जीवन का फल होता है। वो कोई ऐसी बात नहीं होती कि हमने तय कर लिया कि आज से हम अलग हो गए। वो तो तुम हो जाते हो। जैसे फल लगता है पेड़ में। पेड़ तय थोड़ी करता है कि अब फल पैदा करना है। पेड़ में फल लगता है, वैसे ही मन की ये जो सारी वृत्तियाँ है, इनसे दूरी अपने आप बनती है। जब दूरी बनेगी, मैं दौराह रहा हूँ, वृत्तियाँ तब भी, रहेंगी भी और वैसी ही रहेंगी, कैसी?

खोखली, क्योंकि वो उनके अलावा और कुछ नहीं हो सकती। वही उनकी प्रकृति है। वो वैसा ही रहेगा। तुम उससे दूर रहोगे। तुम उससे दूर रहोगे। दूर होने में साफ़-साफ़ सब चीज़े दिखाई पड़ती है, उनको जान भी पाते हो। गंदगी के बीच भी अनछुए रह जाते हो।

आचार्य प्रशांत
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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

शान्ति वो आराम है जो निर्बाध्य रहता है, अक्षुण्ण रहता है, अविचल रहता है

एक मोटा आदमी कुर्सी पर बैठ के आराम कर रहा है। और एक स्वस्थ, सुडौल, मज़बूत काठी का छरहरा आदमी दूसरी कुर्सी पर बैठा हुआ

आचार्य प्रशांत, रवीन्द्रनाथ टैगोर पर: वासना निर्बल और निराधार क्यों?

भक्ति सबल होती है, क्यों? क्योंकि वो उसको पा लेती है जो उसका ध्येय होता है। वासना निर्बल होती है, क्यों? क्योंकि वो उसको नहीं पा पाती, जो उसका ध्येय होता है। भक्ति सबल है, ज्ञान सबल है, ध्यान सबल है, समर्पण सबल है, तपस्चर्या सबल है। ये पा लेते हैं। कम से कम, पा सकते हैं। वासना की तो प्राप्ति की सम्भावना ही शून्य है, वो न पाती है और न ही पा सकती है; अति दुर्बल है। दुर्बल बहुत है, लेकिन ज़िद और घमंड उसमें पूरा है। ये बात मज़ेदार है। ज़िद और घमंड हमेशा तुम दुबर्लता के साथ ही देखोगे। जो जितना कमज़ोर होगा, वो उतना ज़िद्दी, उतना घमंडी। और जहाँ बल आ जाता है, वहाँ सर झुक जाता है। बल, किस में कहा हमने कि होता है? भक्ति में। और भक्त का सर तो? झुका रहता है। जो बलवान है वो झुका रहेगा। और जो जितना दुर्बल है, वो उतना अकड़ेगा। वो उतना अपने में फूला फूला फिरेगा। और वो उतना असफल जियेगा।

आचार्य प्रशांत
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
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