प्रतियोगी मन – हिंसक मन

प्रश्न: सर प्रतियोगिता से डर लगता है। ऐसा क्यों? वक्ता: प्रतियोगिता का डर है क्योंकि प्रतियोगिता का अर्थ ही है, डर। केवल डरपोक लोग ही

यथार्थ है सहज जानना

हमारा जीवन ऐसा ही है- ‘मेरे सपने क्यों टूट गए?’ अरे सपने थे, टूटेंगे ही, यथार्थ में आओ| क्योंकि तुम्हें सिखाया गया है, ‘ऊँचा सोचो, बड़ा सोचो’, तो तुम्हारा जीवन ही सपनों से भर गया है|

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