संचय और डर

हम क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं, जानते हो?

हमें लगता है कोई अनहोनी घट जाएगी कल| आगे पता नहीं क्या हो तो पहले से इंतज़ाम करके रख लो|

दुनिया में और कोई भी नहीं है जो इतना डरा हुआ हो| अस्तित्व में कोई भी इतना ज़्यादा खौफ़ज़दा है ही नहीं जितना इंसान है| सब को भरोसा है; सबको एक आंतरिक भरोसा है कि “जो भी होगा चल जायेगा काम”| उन्हें सोचने की जरूरत ही नही पड़ती |

सभ्यता किस लिए है?

व्यक्ति से व्यक्ति का कोई सम्बन्ध ही ना रहे क्योंकि व्यक्ति से व्यक्ति का जो भी सम्बन्ध बनेगा उसका आधार तो एक ही है, हमारा अहंकार| हम जिसे प्रेम भी कहते हैं वो कुछ नहीं है वो एक अहंकार का दुसरे अहंकार से मिलना है| बड़े अहंकार का छोटे अहंकार से, माँ अहंकार का बच्चे अहंकार से, पुरुष अहंकार का स्त्री अहंकार से और इस तरह से मिलना है कि दोनों का ही अहंकार बल पाता है|

पुरुष जितना पुरुष स्त्री के सामने होता है, उतना कभी नहीं होता| यदि आप पुरुष हैं तो सामान्यता आप ये भूले रहेंगे कि आप पुरुष हैं लेकिन जैसे ही कोई स्त्री सामने आयेगी, आपका पुरुष जग जाएगा| यदि आप स्त्री हैं तो शायद आपको याद भी ना हो कि आप स्त्री हैं पर आप पुरुषों के बीच में बैठेंगी और आपको तुरंत याद आ जायेगा| आप पल्लू ठीक करने लगेंगी|

निम्न विचार और उच्च विचार क्या?

प्रश्न: निम्न विचार और उच्च विचार क्या हैं? वक्ता: हम में से कितने लोगों को ये सवाल अपने सन्दर्भ में उचित लग रहा है? कितने लोगों

मृत्यु में नहीं, मृत्यु की कल्पना में कष्ट है

प्रश्न: मृत्यु से भय इसलिए नहीं लगता कि शरीर छूट जाएगा, पर मृत्यु से पहले का कष्ट आक्रांत करता है| इस कष्ट से बचने का

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