कामवासना और प्रेम में क्या अंतर है?

तुम किसी औरत के पास जाते हो, कोई औरत किसी आदमी के पास जाती है। दोनों, वास्तव में, न आदमी से सरोकार रख रहे हैं, न औरत से सरोकार रख रहे हैं, हर आदमी को परमात्मा चाहिए। तुम इसमें भी परमात्मा खोज रहे हो, इन सवालों में भी, उस पानी में भी, खाना खाने जाओगे, उसमें भी, कोई नौकरी करोगे, उसमें भी, किसी से मिलोगे उसमें भी, और सम्भोग के क्षण में, औरत में भी। हर आदमी, औरत के माध्यम से परमात्मा को पाना चाहता है; हर औरत, आदमी के माध्यम से परमात्मा को पाना चाहती है। यही कारण है, कि आदमी और औरत का रिश्ता, कभी बहुत पक्का हो नहीं पाता।

आचार्य प्रशांत
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अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

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आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

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 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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क्यों ज़रुरी है कि संसार का काम चलता रहे?

अगर सत्य को सबसे ऊपर रखोगे तो कहोगे वो सबसे ऊपर; आगे का वो तय करेगा। काम-धंधे चलने होंगे तो चलेंगे और नहीं चलने होंगे तो ठप पड़ जाए। प्रथम वरियता तो उसको है ना। आगे की वो जाने और हमें क्या पता कि हमारे लिये कौन सा काम उचित है। जो सत्य में नहीं है जो झूठ में है वो काम भी कैसे कर रहा होगा? तो अभी तो मैं यह भी नहीं जानता कि काम कौनसा ठीक। सत्य में आने के बाद ही तो पता चलेगा कि करने लायक काम है भी कौनसा है।
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अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

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जहाँ लालच वहाँ गुलामी

हम जो बार-बार अपनी असमर्थता का रोना रोते हैं, वह कुछ नहीं है, हम एक बड़ा दोहरा खेल खेलना चाहते हैं।

हम कहते हैं, हमारा लालच भी बरकरार रहे और हम गुलाम भी न बनें। यह अब नियमों के विपरीत बात कर रहे हैं आप। आप चाहते हैं आपका लालच भी बरकरार रहे और आपको गुलाम भी न बनना पड़े।

जहाँ लालच है, वहाँ गुलामी है।

जिसको गुलामी छोडनी है, उसे लालच छोड़ना होगा। अगर आप बार-बार पा रहे हैं कि आप गुलाम बन जा रहे हैं, तो देखिए कि क्या-क्या लालच है, उस लालच को हटा दीजिए और गुलामी को हटा दिया आपने।

ये वादे कभी पूरे नहीं होते

लाओ त्सू ने बड़े मज़े में इस बात को बोला है,
“जब नैतिकता ख़त्म हो जाती है, तो नैतिकता का प्रशिक्षण शुरू हो जाता है।”

नैतिकता का प्रशिक्षण इस बात का पक्का सबूत है कि नैतिकता ख़त्म है।
जब प्रेम ख़त्म हो जाता है, तो प्रेम की बातें शुरू हो जाती हैं।
और प्रेम की बातें इस बात का पक्का सबूत हैं कि प्रेम ख़त्म है।
जब धर्म ख़त्म हो जाता है, तो धार्मिक शिक्षा शुरू हो जाती है।
जब ईमानदारी ख़त्म हो जाएगी, तो ईमानदारी के नियम कायदे बना दिए जाएँगे।

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