सहजता आचरण-बद्ध नहीं

मान लो गाली आयी और ठीक उसी स्थिति में सब कुछ जानते हुए, एक सहज प्रतिक्रिया निकलती है, एक सहज और वो कुछ भी हो सकती है। ये भी हो सकता है कि तुम वहाँ से चल दो, ये भी हो सकता है कि तुम ध्यान ही ना दो और ये भी हो सकता है कि तुम उसका गला पकड़ लो। सब कुछ संभव है।

टाल-मटोल की आदत

जिसमें तुम्हें महत्व नहीं समझ आता, जो तुम दूसरों के इशारे पर बस ज़ोर-ज़बरदस्ती में कर रहे हो, कि किसी ने धक्का दे दिया, तुम धकेले जा रहे हो और कर रहे हो उसमें टालमटोल होती है। तुम्हारे जीवन में इतनी ऊब इसलिए है क्योंकि कुछ भी तुम्हारा अपना नहीं है जीवन में। जब कुछ अपना होता है तो आदमी उसे कभी नहीं टालता। टाल सकता ही नहीं है।

मन प्रशिक्षण के अनुरूप ही विषय चुनेगा

प्रश्न: मेरी कमज़ोरी यह है कि मैं एकाग्र नहीं हो पाती हूँ। तो एकाग्रता को मैं अपनी ताकत कैसे बनाऊँ? वक्ता: तो सीधे सीधे सवाल

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