मंदिर-जहाँ का शब्द मौन में ले जाये

प्रश्न: ‘अनहता सबद बाजंत भेरी’, कृपया इसका अर्थ बताएँ? वक्ता: मंदिर से जो घंटे, घड़ियाल, ढोल, नगाड़े की आवाज़ आ रही है; वो ‘अनहद’ शब्द है | घंटा जैसे बजता

विश्वास नहीं, विवेक

दुनिया ऐसे ही लोगों से भरी है जिनके दिल टूट गए हैं ये मान-मान कर। क्या माँगा था और पाया क्या ! अरे तुमने मान ही क्यों लिया? तुम खुद क्यों नहीं जान सकते थे?

नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः

वक्ता: एक उपनिषदिक् वाक्य है: नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः जो बलहीन है वो कभी भी अपने करीब नहीं पहुँच सकता| जो इतना डरपोक, मुर्दा और निर्बल है

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