शाश्वत उन्मत्तता प्रेम की

वक्ता : रूमी की कुछ पंक्तियाँ- ‘प्यार में तुम्हारे नशे के अलावा और कुछ भी शाश्वत नहीं है ! अपना  जीवन लेकर तुम्हारे सामने आया

ध्यान संकल्प है बोध में उतरने का

वक्ता: हम देखते हैं। तो एक तो यह है हमारा आम रोज़-मर्रा का देखना कि नदी को देख रहे हैं। यह बड़ा खण्डित, आधा-अधूरा होकर

आदर्शों को अस्वीकार करो

श्रोता: कुछ  उपलब्धियां पाने के बाद एक महान व्यक्ति के लिए आसान होता है अपने रास्ते  को बताना और सुनकर ऐसा लगता है कि कितना आसान रास्ता है। क्या हमें

लिखनी है नयी कहानी?

जीवन की कहानी लिखी जा चुकी है, और उस कहानी से तुम न भटको इसका पूरा इंतज़ाम भी है। यदि स्वयं से प्रेम है तो ही नयी कहानी की संभावना है जो पूर्णतया तुम्हारी होगी। चुनौती स्वीकार है नयी राह बनाने की?

जवानी अकेले दहाड़ती है शेर की तरह

वक्ता : मुझे बड़ी ख़ुशी होती इस सवाल का कोई सकरात्मक जवाब देकर । सवाल तुमने इस तरीके से पूछा है कि लगता है, “लक्ष्य ‘मेरे’

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