मैं मशीन नहीं

क्या मशीन का मालिक कभी मशीन में समा जाता है? मशीन का मालिक उससे ज़रा-सा दूर रहता है। तो जब भी कुछ यंत्रवत होता देखो, तो जान जाओ कि ये एक मशीन है और मैं उस मशीन का मालिक हूँ।

कैसे जियें?

जो भी कुछ कर रहे हो, खेल रहे हो तो पूरी तरह खेलो, सुन रहे हो तो सिफ सुनो, खा रहे हो तो सिर्फ खाओ, पढ़ रहे हो तो सिर्फ पढ़ो, बोल रहे हो तो पूरा ध्यान सिर्फ बोलने में, तब भूल जाओ कुछ भी और, यही ज़िन्दगी है, यही जीवन है। प्रतिपल जो हो रहा है, यही तो जीवन है, इससे अलग थोड़ी कुछ होता है जीवन।

मैं कोई आदर्श नहीं

मन कहता है कि बस मैं यह जान लूँ कि किसी और ने क्या किया है और अपने जीवन को वैसा बना दूँ। कुछ नया करने की आवश्यकता कहाँ है? अतीत में जो कुछ हुआ है, दौहराते चलो और तुम्हें बड़ा मज़ा आता है, यह बोलने में कि वह मेरा रोल मॉडल है और तुम यह नहीं देखते कि रोल मॉडल बनाते ही तुमने जीवन का नाश कर दिया।

मनुष्य और परम की रचना में क्या फर्क है?

बच्चा इस कारण नहीं नाचता क्योंकि उसे कुछ चाहिए। बच्चा नाचता है क्योंकि वो पहले ही खुश है, हम नाचते हैं ताकि कोई खुश हो जाएँ।

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