आचार्य प्रशांत, क़ुरआन पर: सुनाई देगा अगर सुनना चाहोगे

ऐसी मरनी क्यों मरें, दिन में सौ-सौ बार। न मर सकते हैं, न जी सकते हैं। उसी को तो ग़ालिब ने कहा है, ‘मुझे क्या बुरा था मरना, गर जो एक बार होता।’ हमें क्या बुरा था मरना, अगर एक बार होता। मर लेते, अगर एक ही बार मरना होता। ये रोज़-रोज़ का मरना, तिल-तिल कर के घुटना; ये नहीं बर्दाश्त होता। इसी को कह रहे हैं मोहम्मद, ‘जो सबसे बड़ी आग में प्रवेश करते हैं, जहाँ वे न तो मर जाते हैं और न ही जीते हैं।’

एक बड़ी ख़ूबसूरत बात कही गई है!

यदि तुम्हारी रक्षा नहीं हो रही है ‘कष्टों’ से, ‘मुसीबतों’ से, ‘भय’ से, तो कारण सीधा है! क्या? तुम धर्म भ्रष्ट हो गए हो।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

मैं अपना दुःख स्वयं हूँ

जब पाओ अपने आपको कि दुःख के मौके पर भी सुख कि उम्मीद अभी छोड़ी नहीं है, तो व्यर्थ ही अपने भाग्य को कोसो मत | न कहते फिरो कि, “हम तो बड़े दुखी हैं | हम तो बड़े दमित हैं | हम तो बड़े दलित हैं | हमारे साथ तो बहुत बुरा हुआ है |” बुरा क्या हुआ है? तुम तो अभी भी भोग के उत्सुक हो | बुरा क्या हुआ है? तुम्हारी रीढ़ टूट गयी है क्या? तुम्हें तो अभी भी आस बंधी ही हुई है कि आज छिना है तो कल मिलेगा | घात लगाकर तो तुम बैठे ही हो की शिकार कल कर लेंगे, आज भले भूखे रह गए | व्यर्थ फिर ये चेहरे पर आँसूं छलकाने की जरूरत नहीं है |

ईमानदार रहो, ईमानदारी काफी है |

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

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पिछले जन्म से क्या अर्थ है?

अभी के कर्म में पूर्णता हो तो आगे के लिए तो कुछ छूटता ही नहीं और पीछे वाला भी साफ होने लग जाता है। बड़ी चमत्कारीक बात है, अभी में अगर ठोस पूर्णता है तो इतना ही नहीं की उससे आगे के लिए कुछ नहीं छूटता, जो पीछे वाला है उसका असर भी कम होने लग जाता है।
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अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: +91-9818591240
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

वह निःसंग है; मात्र वह ही है

कैवल्य का यही अर्थ होता है कि मात्र वो है, केवल वो है, उसके अलावा और कोई है ही नहीं। तो उसका कोई संगी है, ये प्रश्न ही नहीं पैदा होता। संगी का अर्थ ही हुआ कि दो है, कि परम सत्ता दो हैं। ना, वो असंग है। इसी को एकांकीपन कहते हैं। “नो पार्टनर हैज़ गॉड”, इसी बात को कहा जाता है ‘एकांकीपन’।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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सच वो जो कभी छोड़ के न जाए, जो जा सकता उसकी बस चिंता सताए

तो सत्य वो, जो ऊँचे से ऊँचा, सुन्दर से सुन्दर, खरे से खरा, और असली से असली है इसलिए सच सिर्फ़ उसको माना गया है। जो धोखा नहीं दे देगा, जो पलक झपकते गायब नहीं हो जाएगा और पलक झपकाने की अवधि कुछ भी हो सकती है, हो सकता है कि सहस्त्रों, वर्षों उसे पलक झपकने में लगते हों। निर्भर करता है, किसकी पलक है! तो जो पलक झपकते गायब हो जाए, जो आज है कल नहीं, उसे तुम सच मानते हो क्या? अपने आम अनुभवों से भी बताओ? उसको तो तुम यही कहते हो कि भ्रम था, धोखा था। हमें लगा और फिर देखा, तो पाया नहीं। भासित हुआ और उस पर यकीन किया, तो धोखा खाया। कुछ यदि ऐसा है, तो उसे सच कहोगे? तो इसलिए समय में जो कुछ है, उसे सत्य नहीं माना गया है। इसलिए संसार, समय दोनों सत्य की छाया माने गए, सत्य का फैलाव माने गए पर प्रत्यक्ष रूप से उन्हें सत्य का दर्ज़ा नहीं दिया गया।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: वी.एन.ए रिसोर्ट, ऋषिकेश

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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