आत्म- विचार से आत्म-बोध तक

वक्ता: देखो, जो मैं कह रहा हूँ अगर वो पूरी तरह समझ में ना आए तो हैरान मत होना, ये बातें पूरी तरह समझने वाली

दुःख – सुख की स्मृति

सुख का साथी जगत सब, दुख का नाही कोय । दुःख का साथी साइयां, ‘दादू’ सदगुरु होय ॥              

अध्यात्म क्या है?

प्रश्न: अध्यात्म क्या है? वक्ता: जानना आपका स्वभाव है| और अगर आप साधारण जानने से ही शुरू करें तो आप जो कुछ जानना चाहते हैं, उसके

असली रण अपने विरुद्ध है

कबिरा रण में आइ के, पीछे रहे न सूर | साईं के सन्मुख रहे, जूझे सदा हुजूर || -कबीर प्रश्न: जूझने की बात क्यों की जा रही है ?

विचार तीन प्रकार के

प्रश्न: सर, आपने कहा कि समझ आ जाए, तो जीवन में सोचने-विचारने की आवश्यकता कम हो जाती है| पर क्या समझ विकसित करने के लिए

आदत नहीं, औचित्य

प्रश्न: प्राथमिकता और आदत में क्या अंतर है? वक्ता: हर प्राथमिकता एक आदत है, इनमें कोई अंतर नहीं है। कोई भी आदत आकर नहीं कहेगी,

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