विचार और वृत्तियाँ ही हैं मन

मन और संसार दोनों विचार के अलावा और कुछ नहीं हैं।

यह बोध तुम्हें बहुत ही विनीत कर देता है। पर यह अहंकार के लिए बड़ा ही खतरनाक होता है क्योंकि हम लगातार इसी आधार पर ज़िन्दा हैं कि बाहर जो कुछ है, वो असली है – हमारी पहचान, हमारे रिश्ते-नाते, रुपया-पैसा, यह सब कुछ जो बाहर है वो असली है।

क्या यही मूल भ्रम नहीं है?
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श्री प्रशांत ‘मिथक भंजन यात्रा’ का दूसरा चरण धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आरम्भ कर रहे हैं।

25 अप्रैल से।

कृपया अपनी जगह आरक्षित कर लें।

परिपक्वता क्या है?

प्रश्न: सर, परिपक्वता क्या है? वक्ता: (१८-२२ वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की सभा को संबोधित करते हुए) यह शब्द ‘परिपक्वता’ हम सभी को अपने लिए महत्वपूर्ण

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