अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करें? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2019)

जो तुम उपलब्ध करना चाहते हो, अपने आप को बार-बार याद दिलाओ कि वो तुम क्यों उपलब्ध करना चाहते हो, और वो उपलब्ध करके क्या मिलेगा।

उपलब्धि से पहले की प्रेरणा क्या है, इंस्पिरेशन क्या है – ये अपने आप को बार-बार याद दिलाओ, क्योंकि ये हम भूल जाते हैं।

और उपलब्धि के बाद क्या मिलेगा, उसका परिणाम क्या है, रिसल्ट क्या है, ये भी अपने आप को बार-बार याद दिलाओ, क्योंकि वो भी हम भूल जाते हैं।

मेहनत या स्मार्टनेस?

हम जब यह सवाल पूछ लेते हैं कि स्मार्ट वर्क करू कि हार्ड वर्क पर यह तो पूछते ही नहीं हैं कि उस कार्य को करने वाला कौन है? इसी कारण उस कर्म की उस कार्य की दिशा क्या है ये कभी नहीं पूछते। सवाल तो पूछ लेते हैं। यह नहीं पूछते कि किस चित्त से सवाल उठ रहा है? मैं कभी भी सवालों के जवाब नहीं देता हूँ। सवाल तो सतही होते हैं। मैं जो सवाल देता हूँ, उसमे मैं मन को समाधान देता हूँ। उस मन को, जिस मन से प्रश्न उठा है।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

मन की दौड़

‘मन का होना ही एक दौड़ है’ और व्यर्थ ही नहीं दौड़ रहा, उसे वास्तव में पहुंचना है; वो बेचैन है, उसकी बेचैनी झूठी नहीं है लेकिन मन का दौड़ना वैसा ही है, जैसे कोई इस कमरे के भीतर-भीतर दौड़ता रहे

अपने रास्ते की बाधा तुम खुद हो

जबकी जीवन का नियम यह है कि जब जो होना होता है, होता है तुम्हारे करने की ज़रुरत होती नहीं। लेकिन तुम्हारा सारा ज़ोर इस पर है कि मैं करूंगा और तुम्हारा यह भाव कि ‘मैं करूंगा’ सारे होने को रोक देता है, जाम लगा देता है। जो हो जाए खुद हो जाए तुम्हारे रहते वो हो नहीं पाता और फिर तुम रोते हो कि मेरे काम नहीं होते। तुम्हारे काम इसीलिए नहीं होते कि तुम करने की कोशिश में लगे हो। तुम अपनी कोशिश छोड़ दो तो सारे काम हो जाएंगे। तुम खुद बीच में खड़े हुए हो।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 24 तारीख को अपना 27वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

ईसा मसीह के जन्म दिवस को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने का इस बोध शिविर से बेहतर मौका कहाँ हो सकता है!

विश्व भर के आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने, आचार्य प्रशांत जी के संग समय बिताने, और गंगा किनारे बैठ खुदमें डूब जाने का भी यह एक अनूठा अवसर है।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

जहाँ लालच वहाँ गुलामी

हम जो बार-बार अपनी असमर्थता का रोना रोते हैं, वह कुछ नहीं है, हम एक बड़ा दोहरा खेल खेलना चाहते हैं।

हम कहते हैं, हमारा लालच भी बरकरार रहे और हम गुलाम भी न बनें। यह अब नियमों के विपरीत बात कर रहे हैं आप। आप चाहते हैं आपका लालच भी बरकरार रहे और आपको गुलाम भी न बनना पड़े।

जहाँ लालच है, वहाँ गुलामी है।

जिसको गुलामी छोडनी है, उसे लालच छोड़ना होगा। अगर आप बार-बार पा रहे हैं कि आप गुलाम बन जा रहे हैं, तो देखिए कि क्या-क्या लालच है, उस लालच को हटा दीजिए और गुलामी को हटा दिया आपने।

इन्हें तुम ज़रूरतें कहते हो?

अपनी ज़िंदगी में से अगर तुम ऐसे दो-तीन खर्चे भी निकाल दो, तो तुम्हारी ज़िन्दगी कम पैसे में भी बड़े आराम से चलेगी|

पहला ये ख्याल कि एक आलिशान मकान होना चाहिए|
दूसरा ये कि बच्चों को बड़े-से-बड़े स्कूल में पढ़ाने के लिए खूब जोड़ कर रखना है|
और तीसरा कि बुढ़ापे के बीमारी के लिये बचाकर रखना है|

ये तीन भ्रम तुम दिमाग से निकाल दो और मुक्त जियोगे| बिल्कुल मुक्त जियोगे| जितना भी मिलेगा, बहुत मिलेगा| आराम से ख़र्चा-पानी भी चलेगा और बच भी जायेगा, उधार भी दे दोगे|

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