मेरा असली स्वभाव क्या है?

कुत्रापि खेद: कायस्य जिह्वा कुत्रापि खेद्यते।  मन: कुत्रापि तत्त्यक्त्वा पुरुषार्थे स्थित: सुखम्।।  ~ अष्टावक्र गीता(१३.२)  अनुवाद: शारीरिक दुःख भी कहाँ है, वाणी के दुःख भी

आपके जाने के बाद भूल क्यों जाता हूँ?

जब भी कोई समस्या बहुत बड़ी लगने लगे, तो एक सवाल पूछना अपने आप से? “समस्या बड़ी है या मैं छोटा अनुभव कर रहा हूँ।” ईमानदार उत्तर हमेशा एक ही मिलेगा- समस्या बड़ी नहीं है, तुम अपने आप को बहुत छोटा मानते हो। और छोटा मानने का जो कारण है वो बता दिया है

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