बदलो नहीं, समझो

तुम्हारी हर इच्छा, हर वस्तु, हर राह, हर कोशिश सिर्फ़ अपने स्त्रोत तक पहुँचने के प्रयास हैं। लेकिन जीवन के कुछ विकृत प्रभाव हैं जिनके कारण तुम परोक्ष रास्ते ले लेते हो – जैसे हत्या, चोरी, सिगरेट, महत्वाकांक्षा। परन्तु अस्तित्व में कुछ भी घृणित नहीं होता, अतः कुछ भी बदलने की चेष्टा मत करो। सिर्फ समझो। सही बदलाव समझ में स्वतः हो जायेगा।

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