वहीँ मिलेगा प्रेम

अनाड़ी मन जो होता है उसके लिए जमीन का प्रेम, जमीन से बंधे रहने की जंजीर बन जाता है। और जो ज्ञानी होता है उसके लिए ज़मीन का प्रेम, आसमान में उड़ने का पंख बन जाता है। अनाड़ी मन के लिए तथ्य सिर्फ एक बंद कोठरी रह जाते हैं, मुर्दा तथ्य। और जागृत मन के लिए, यही तथ्य सत्य का द्वार बन जाते हैं। जमीन तुम्हारा बंधन भी है और तुम्हारा अवसर भी। इसी से चिपके रह गए और ध्यान न दिया और समर्पित न हुए, तो इससे बड़ा बंधन नहीं है।

सँसार महा बंधन है, पर यही सँसार, मुक्ति का अवसर भी है। सब-कुछ तुम पर निर्भर करता है।

1 2 3 4 5 11