संवेदनशीलता, भावुकता नहीं

संवेदना का अर्थ ये नहीं है कि तुमने किसी
को रोते देखा और तुम रोने लग गए। संवेदना अर्थ है कि तुमने किसी को रोते
देखा और तुम जान गए कि उसका जो कष्ट है, वो कितना नकली है। और जब तुम जान
जाते हो कि कष्ट नकली है, तभी तुम उसके कष्ट का उपचार भी कर सकते हो।

संसारी कौन? जो संसार से पूर्णतया अज्ञानी हो

तवैवाज्ञानतो विश्वं त्वमेकः परमार्थतः। त्वत्तोऽन्यो नास्ति संसारी नासंसारी च कश्चन॥ -अष्टावक्र गीता (१५.१६) अनुवाद: अज्ञानवश तुम ही यह विश्व हो पर, ज्ञान दृष्टि से देखने

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